गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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NSE का IPO: इक्विटी ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी और सख्त नियमों के बीच क्या हैं एक्सचेंज की बड़ी चुनौतियाँ?

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) ऐसे समय में आने वाला है जब एक्सचेंज कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी…

NSE का IPO: इक्विटी ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी और सख्त नियमों के बीच क्या हैं एक्सचेंज की बड़ी चुनौतियाँ?
(फोटो: IANS)

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) ऐसे समय में आने वाला है जब एक्सचेंज कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इक्विटी ऑप्शंस में लगातार घटती बाजार हिस्सेदारी, डेरिवेटिव्स सेगमेंट में कड़े होते सरकारी नियम और कैश सेगमेंट में ग्रोथ की सीमित संभावनाएँ NSE के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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एक्सचेंज द्वारा अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वित्त वर्षों में इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू के आधार पर) में उसकी बाजार हिस्सेदारी में 22.2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। यह हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 96.9 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में और कम होकर 74.71 प्रतिशत पर आ गई।

डेरिवेटिव्स पर सख्त नियम

एनएसई के लिए एक और बड़ी चुनौती सरकार और बाजार नियामक सेबी द्वारा डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर नियमों को सख्त बनाना है। निवेशकों को होने वाले बड़े नुकसान को देखते हुए सरकार ने हाल के वर्षों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को हतोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी और मार्जिन कम करना शामिल है। इसके अलावा, सेबी भी निवेशकों को डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के जोखिमों के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है।

इन प्रयासों का असर भी दिखने लगा है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में कारोबार करने वाले खुदरा निवेशकों की संख्या में कमी आई है। वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या 98.1 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई। NSE ने खुद अपने RHP में स्वीकार किया है कि F&O बाजार में वॉल्यूम में किसी भी तरह की कमी उसके कारोबार और मुनाफे पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

कैश सेगमेंट में ग्रोथ की सीमा

हालांकि, इक्विटी कैश सेगमेंट में NSE की पकड़ बेहद मजबूत बनी हुई है। पिछले तीन वित्त वर्षों में इस सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी लगातार 90 प्रतिशत से ऊपर रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में यह 92.7 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2024-25 में 93.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत दर्ज की गई। लेकिन बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह मजबूत स्थिति ही सीमित विकास के अवसरों की ओर भी इशारा करती है, क्योंकि यहां से हिस्सेदारी बढ़ाना मुश्किल है।

इनपुट: IANS

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