तुर्किए से बड़े ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह का प्रत्यर्पण, गृह मंत्री अमित शाह ने बताया 'ऐतिहासिक उपलब्धि'
केंद्र सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बताया कि तुर्किए से कुख्यात ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह को भारत वापस लाया गया है…
केंद्र सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बताया कि तुर्किए से कुख्यात ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह को भारत वापस लाया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री ने इस कार्रवाई को मोदी सरकार की 'ऐतिहासिक उपलब्धि' करार दिया है।
नवप्रीत सिंह पर भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का आरोप है। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि सिंह ने 'नवाब विर्क' नाम से एक फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर तुर्किए की नागरिकता ले ली थी। इसके बावजूद वह अफगानिस्तान से भारत में ड्रग्स की तस्करी करता रहा।
गृह मंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा, "हमारी एजेंसियों ने उसका पता लगाया, उसकी असली पहचान का खुलासा किया और उसे डिपोर्ट करवाया। आज उसे भारत वापस लाया गया है और ड्रग तस्करी व अन्य अपराधों के मामलों में जेल भेज दिया गया है।"
ड्रग्स के खिलाफ सरकार का संकल्प
इस सफलता पर सभी संबंधित एजेंसियों को बधाई देते हुए, गृह मंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार दिसंबर 2029 से पहले हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
यह हाल के महीनों में विदेशी धरती से प्रत्यर्पित किया गया पहला बड़ा ड्रग तस्कर नहीं है। इससे पहले अप्रैल में दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले और ड्रग तस्करी के संदिग्ध मोहम्मद सलीम डोला को भी तुर्किए से भारत लाया गया था। उस समय भी गृह मंत्री ने इसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की एक बड़ी सफलता बताया था, जो संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्यों को कानून के दायरे में लाने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।
इसी तरह, मई में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने CBI के साथ मिलकर अजरबैजान से प्रभदीप सिंह नामक भगोड़े का प्रत्यर्पण कराया था। प्रभदीप का मामला 358 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़ा था और वह 2023 से फरार था।
भारत-तुर्किए प्रत्यर्पण संधि
भारत और तुर्किए के बीच अपराधियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया एक द्विपक्षीय संधि के तहत होती है। दोनों देशों ने 2001 में एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो जून 2002 में लागू हुई। यह समझौता दोनों देशों को आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित भगोड़ों के प्रत्यर्पण का अनुरोध करने की अनुमति देता है। पूर्व में भी तुर्किए ने संदिग्ध इस्लामिक स्टेट ऑपरेटिव सहित चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों को भारत को सौंपा है।
इनपुट: IANS



