भारत बन सकता है ग्लोबल डेटा हब: पीयूष गोयल ने गिनाईं 4 बड़ी वजहें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत को डेटा सेंटरों के लिए दुनिया की सबसे आकर्षक जगहों में से एक बताते हुए अमेरिकी कंपनियों और भारतीय-अमेरिकी उद्यमियों से निवेश की जोरदार अपील की है…
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत को डेटा सेंटरों के लिए दुनिया की सबसे आकर्षक जगहों में से एक बताते हुए अमेरिकी कंपनियों और भारतीय-अमेरिकी उद्यमियों से निवेश की जोरदार अपील की है। शिकागो में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उन प्रमुख वजहों पर प्रकाश डाला जो भारत को इस क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बना सकती हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गोयल ने यूएस इंडियन कम्युनिटी फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच भारत एक भरोसेमंद देश है, जहां कंपनियां अपने डेटा और निवेश को सुरक्षित महसूस कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "भारत डेटा सेंटर बनाने के लिए दुनिया की सबसे अच्छी जगह है।"
भारत के पक्ष में क्या हैं बड़ी बातें?
1. विशाल और स्वच्छ ऊर्जा ग्रिड: पीयूष गोयल ने बताया कि भारत में अब एक एकीकृत राष्ट्रीय पावर ग्रिड है, जो चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा ग्रिड है। उन्होंने कहा, "एक जुड़े हुए ग्रिड में 520 गीगावाट बिजली है। और अगले 6 या 7 सालों में, यह 1000 गीगावाट हो जाएगी।" खास बात यह है कि इस 520 गीगावाट क्षमता में 60% हिस्सा पहले से ही सौर, पवन, पनबिजली और परमाणु ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा का है। गोयल ने अनुमान जताया कि 2033 तक जब क्षमता 1000 गीगावाट होगी, तो इसमें से 70% स्वच्छ ऊर्जा होगी।
2. कम लागत पर 24 घंटे बिजली: मंत्री के अनुसार, ग्रिड का विशाल आकार डेटा सेंटरों के लिए पावर बैकअप (रिडंडेंसी) सुनिश्चित करता है। उन्होंने दावा किया, "हम दुनिया में कहीं भी सबसे कम कीमत पर चौबीसों घंटे क्लीन एनर्जी या रिन्यूएबल एनर्जी दे सकते हैं।" उन्होंने बताया कि कंपनियां सात से आठ सेंट में 24 घंटे 80% गारंटीड स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त कर सकती हैं, जबकि 100% स्वच्छ ऊर्जा की लागत लगभग 11 या 12 सेंट होगी।
3. सस्ता डेटा और इंफ्रास्ट्रक्चर: गोयल ने भारत में डेटा की बेहद कम लागत पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, "भारत में डेटा की लागत दुनिया में सबसे कम है, शायद सबसे कम।" उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि यह अमेरिका में प्रति गीगाबाइट भुगतान की जाने वाली कीमत का लगभग पांच से आठ प्रतिशत हो सकता है। इसके अलावा, भारत में डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की लागत भी अमेरिका या यूरोप की तुलना में एक-चौथाई से एक-पांचवें हिस्से तक कम है।
4. कुशल मानव संसाधन: भारत के विशाल टैलेंट पूल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में हर साल विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में लगभग 14 लाख छात्र ग्रेजुएट होते हैं, जो इस उद्योग के लिए एक बड़ी ताकत हैं।
भारत-अमेरिका साझेदारी का आह्वान
गोयल ने भारत और अमेरिका को एक स्वाभाविक भागीदार बताते हुए कहा, "अमेरिका के पास पूंजी और टेक्नोलॉजी की ताकत है। भारत के पास महत्वाकांक्षा है।" उन्होंने भारतीय-अमेरिकियों को दोनों देशों के बीच एक 'जीवंत पुल' बताते हुए भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान देने के लिए आमंत्रित किया। यह कार्यक्रम उनकी मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद आयोजित हुआ था, जहां उन्होंने अमेरिकी व्यवसायों और निवेशकों से भी मुलाकात की।
इनपुट: IANS



