‘फॉरएवर केमिकल्स’ का तोड़? जापानी वैज्ञानिकों ने खोजे नदी में मौजूद चमत्कारी बैक्टीरिया
पर्यावरण में दशकों तक मौजूद रहने वाले खतरनाक 'फॉरएवर केमिकल्स' (PFAS) से निपटने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। जापान में शोधकर्ताओं की एक टीम ने नदी की तलछट में ऐसे बैक्टीरिया की पहचान की है, जो…
पर्यावरण में दशकों तक मौजूद रहने वाले खतरनाक 'फॉरएवर केमिकल्स' (PFAS) से निपटने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। जापान में शोधकर्ताओं की एक टीम ने नदी की तलछट में ऐसे बैक्टीरिया की पहचान की है, जो इन बेहद जिद्दी प्रदूषकों को पानी से हटाने की क्षमता रखते हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह खोज इन रसायनों से होने वाले प्रदूषण को साफ करने के लिए एक कम लागत वाला और प्रभावी तरीका विकसित करने की उम्मीद जगाती है।
पीएफएएस (PFAS) रसायनों का एक बड़ा समूह है, जिनका इस्तेमाल कपड़ों से लेकर आग बुझाने वाले फोम तक कई औद्योगिक उत्पादों में होता है। इनके कार्बन-फ्लोरीन बंध इतने मजबूत होते हैं कि ये प्राकृतिक रूप से टूटते नहीं और लंबे समय तक पानी, मिट्टी और वन्यजीवों में बने रहते हैं। इसी वजह से इन्हें 'फॉरएवर केमिकल्स' का नाम दिया गया है। अक्सर सैन्य ठिकानों और औद्योगिक क्षेत्रों के पास इनकी मौजूदगी अधिक पाई जाती है।
नदी की तलछट में मिला समाधान
एक जापानी विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने ओसाका प्रीफेक्चर की सामोंडो नदी से तलछट के नमूने एकत्र किए। क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, इन नमूनों से वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे विशेष बैक्टीरियल स्ट्रेन को अलग किया, जो पानी में मौजूद पीएफओएस (PFOS) और पीएफओए (PFOA) जैसे हानिकारक रसायनों की मात्रा को कम कर सकते थे। इस अध्ययन के निष्कर्ष 'जर्नल ऑफ वॉटर प्रोसेस इंजीनियरिंग' के अगस्त अंक में ऑनलाइन प्रकाशित किए गए हैं।
कम लागत में प्रदूषण हटाने की उम्मीद
कोबे विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हिदेयुकी इनुई ने कहा, “यदि हम प्राकृतिक पर्यावरण से एकत्र किए गए बैक्टीरिया को संवर्धित कर उनका इस्तेमाल कर सकें, तो कम लागत में प्रदूषण को दूर करना संभव होगा।” टीम ने प्रयोगशाला के बाहर भी इन बैक्टीरिया की क्षमता का परीक्षण किया और पाया कि एक स्ट्रेन ने औद्योगिक कचरे के लैंडफिल से निकलने वाले दूषित पानी (लीचेट) में भी पीएफएएस की मात्रा को काफी हद तक कम कर दिया। अध्ययन में यह भी पता चला कि बैक्टीरिया इन रसायनों को अपनी कोशिकाओं पर सोखकर उन्हें हटाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इनपुट: IANS



