नोएडा: एयरपोर्ट में नौकरी का झांसा देने वाले गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार, फर्जी वेबसाइट बनाकर करते थे ठगी
नोएडा के सेक्टर-22 से फर्जी एविएशन जॉब और एडमिशन रैकेट चलाने वाले एक गिरोह के वांछित सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान गाजियाबाद निवासी…
नोएडा के सेक्टर-22 से फर्जी एविएशन जॉब और एडमिशन रैकेट चलाने वाले एक गिरोह के वांछित सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी की पहचान गाजियाबाद निवासी डॉक्टर अजय के रूप में हुई है। उसे शुक्रवार को खुफिया जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पकड़ा गया।
यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे एक अभियान का हिस्सा है। इसी मामले में गिरोह के पांच अन्य सदस्यों को पहले ही 8 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था।
इस तरह फंसाते थे लोगों को
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 'लम्बोदर इंस्टीट्यूट' के नाम से एक फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। आरोपी खुद को प्रतिष्ठित एयरलाइंस और एविएशन संस्थानों का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे। वे नौकरी या एडमिशन दिलाने का झांसा देकर उम्मीदवारों को अपने जाल में फंसाते थे।
एक बार जब कोई व्यक्ति उनके झांसे में आ जाता, तो गिरोह उससे अलग-अलग चरणों में पैसे वसूलता था। यह वसूली रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन इंटरव्यू, ट्रेनिंग, मेडिकल, यूनिफॉर्म और सिक्योरिटी डिपॉजिट जैसे कई बहानों से की जाती थी।
विश्वास जमाने के लिए बनाते थे फर्जी वेबसाइट
आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने अपनी ठगी को असली दिखाने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से एक फर्जी वेबसाइट तक बना रखी थी। वे पीड़ितों को फर्जी ऑफर लेटर, एडमिशन कन्फर्मेशन और अन्य दस्तावेज भी भेजते थे, जिससे लोगों को उन पर पूरा यकीन हो जाता था। पीड़ित भरोसे में आकर उनके बताए गए बैंक खातों में पैसे जमा कर देते थे। पुलिस के मुताबिक, ठगी से मिली रकम को कई म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिसे बाद में गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
फिलहाल, साइबर क्राइम थाना पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे नौकरी या एडमिशन के लिए कोई भी भुगतान करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट से प्रामाणिकता की पुष्टि जरूर कर लें।
इनपुट: IANS



