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ग्रेटर नोएडा: 72,000 वर्गमीटर ज़मीन में धोखाधड़ी, पूर्व GM रवींद्र तोंगड़ और CRC ग्रुप के निदेशकों समेत 11 पर FIR

ग्रेटर नोएडा में करीब 72 हजार वर्गमीटर जमीन के आवंटन और लेनदेन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मामले में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व…

ग्रेटर नोएडा: 72,000 वर्गमीटर ज़मीन में धोखाधड़ी, पूर्व GM रवींद्र तोंगड़ और CRC ग्रुप के निदेशकों समेत 11 पर FIR
(फोटो: IANS)

ग्रेटर नोएडा में करीब 72 हजार वर्गमीटर जमीन के आवंटन और लेनदेन से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मामले में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक (GM) रवींद्र तोंगड़, उनकी पत्नी और सीआरसी (CRC) ग्रुप के तीन निदेशकों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ अदालत के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है। नोएडा के सेक्टर-20 थाने में दर्ज इस मुकदमे में जमीन हड़पने, करोड़ों रुपए की रकम में गड़बड़ी और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

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शिकायतकर्ता गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रियलकॉन लिमिटेड के प्रतिनिधि अवि सिंह ने आरोप लगाया है कि रवींद्र तोंगड़ ने प्राधिकरण में अपने पद का दुरुपयोग कर जमीन के लेनदेन में भारी अनियमितताएं कीं। एफआईआर में 6 से 7 अज्ञात लोगों का भी जिक्र है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जमीन के आवंटन, सब-लीज, कंपनियों में हिस्सेदारी और बैंक लेनदेन से जुड़े सभी दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 2011 में शुरू हुआ, जब ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-1, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थित प्लॉट संख्या जीएच-11 (लगभग 72 हजार वर्गमीटर) गायत्री हॉस्पिटैलिटी को लीज पर दिया था। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद जमीन के अलग-अलग हिस्सों को सब-लीज के जरिए दूसरों को देने में कथित तौर पर हेराफेरी की गई।

आरोप है कि 2013 में लगभग 20 हजार वर्गमीटर जमीन की सब-लीज 'इन्टाइसमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड' को दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कंपनी में तोंगड़ के रिश्तेदारों को निदेशक बनाया गया और उनकी पत्नी कुशल सिंह को 73% की हिस्सेदारी दी गई, जबकि मूल कंपनी को इसका निर्धारित भुगतान नहीं मिला। इसके बाद 2014 में करीब 14 हजार वर्गमीटर जमीन एक अन्य कंपनी 'कोमली बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड' के नाम कर दी गई।

करोड़ों की हेराफेरी और फर्जीवाड़े का आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रोजेक्ट में फ्लैटों की बुकिंग शुरू होने के बाद परियोजना का क्षेत्रफल घटाकर करीब 36 हजार वर्गमीटर कर दिया गया और पहले से बुक फ्लैटों को इसी घटे हुए क्षेत्र में समायोजित किया गया। 2015-16 के दौरान करीब पांच करोड़ रुपए के लेनदेन में भी गड़बड़ी का आरोप है।

मामले में नया मोड़ तब आया जब 2018 में कथित फर्जी सब-लीज के आधार पर जमीन पर सीआरसी ग्रुप के साथ मिलकर एक नई परियोजना शुरू कर दी गई। आरोप है कि इसके लिए बैंक से लोन लेने और अन्य मंजूरियों के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। सीआरसी ग्रुप के निदेशक कुणाल भल्ला, सतीश गर्ग और हिमांशु गोयल को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।

न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में दिसंबर 2025 में حساب-کتاب को लेकर हुई बातचीत के दौरान धमकी देने और पीछा करने का भी आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर दर्ज इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। थाना सेक्टर-20 के उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह मामले की विवेचना कर रहे हैं। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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