PoK में मानवाधिकारों पर चिंता: 70 से ज़्यादा ब्रिटिश सांसदों ने UN से हस्तक्षेप की अपील की
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ते मानवाधिकार संकट को लेकर 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ते मानवाधिकार संकट को लेकर 70 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक संयुक्त पत्र भेजकर पाकिस्तानी बलों द्वारा की जा रही बर्बरता को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है।
यह अपील ऐसे समय में आई है जब क्षेत्र में हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जहाँ पाकिस्तानी बलों की कठोर कार्रवाई के कारण सैकड़ों लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबरें हैं। वर्तमान में, PoK में सख्त नाकाबंदी, कर्फ्यू और पूर्ण संचार ब्लैकआउट जैसे हालात बने हुए हैं।
सांसदों ने पत्र में क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव को लिखे पत्र में सांसदों ने कहा, "पिछले कुछ महीनों में, मौतों और चोटों, संचार पर प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, आवश्यक आपूर्ति में व्यवधान और शांतिपूर्ण नागरिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर लगाम की रिपोर्टों ने काफी चिंता पैदा की है।" उन्होंने यह भी बताया कि वे ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी समुदाय के संपर्क में हैं, जो क्षेत्र में अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं।
पत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क के हालिया बयानों का स्वागत किया गया, जिसमें उन्होंने शांति, राजनीतिक संवाद, इंटरनेट की बहाली और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आह्वान किया था। सांसदों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुँचाने वालों को जवाबदेह ठहराने की मांग पर भी जोर दिया।
UN से प्रमुख मांगें
ब्रिटिश सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि PoK की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए अब निरंतर अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपनी विभिन्न इकाइयों के माध्यम से निम्नलिखित सुनिश्चित करने की अपील की:
- हिंसा पर रोक: क्षेत्र में रक्तपात को समाप्त करने और जीवन के और नुकसान को रोकने के प्रयास किए जाएं।
- संचार बहाली: इंटरनेट और अन्य संचार माध्यमों तक पहुंच को तुरंत बहाल और संरक्षित किया जाए।
- आवश्यक आपूर्ति: भोजन, दवा और अन्य ज़रूरी वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो।
- कानूनी अधिकार: मनमानी गिरफ्तारियों को समाप्त किया जाए और सभी को उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार मिले।
- स्वतंत्र निगरानी: मानवाधिकार पर्यवेक्षकों को क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आने-जाने की सुविधा दी जाए।
सांसदों ने अपने पत्र का समापन करते हुए कहा कि मानवाधिकारों पर कभी समझौता नहीं किया जा सकता और स्थायी स्थिरता केवल सार्थक संवाद से ही हासिल हो सकती है, जिसमें कश्मीरी लोगों के अधिकारों और उनकी वैध चिंताओं को सुना जाए।
इनपुट: IANS



