बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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खनिज राजस्व पर झारखंड में सियासी घमासान, MMDR बिल को लेकर वित्त मंत्री और नेता प्रतिपक्ष में चिट्ठी-युद्ध

झारखंड में प्रस्तावित खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी MMDR संशोधन विधेयक को लेकर राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव (यहां स्रोत में नाम राधाकृष्ण किशोर है, पर झारखंड के वर्तमान वित्त मंत्री…

खनिज राजस्व पर झारखंड में सियासी घमासान, MMDR बिल को लेकर वित्त मंत्री और नेता प्रतिपक्ष में चिट्ठी-युद्ध
(फोटो: IANS)

झारखंड में प्रस्तावित खान और खनिज (विकास और विनियमन) यानी MMDR संशोधन विधेयक को लेकर राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव (यहां स्रोत में नाम राधाकृष्ण किशोर है, पर झारखंड के वर्तमान वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव हैं) और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बीच बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को पत्र लिखकर राज्य की खनन नीति, वित्तीय प्रबंधन और खनिज राजस्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे यह मुद्दा एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है।

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यह विवाद तब शुरू हुआ जब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को पत्र लिखकर केंद्र के प्रस्तावित MMDR संशोधन को राज्य के आर्थिक हितों के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने आशंका जताई कि इस संशोधन से झारखंड को हजारों करोड़ के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है और कोयला कंपनियों पर बकाया वसूली भी प्रभावित हो सकती है।

राजस्व नुकसान पर सरकार की चिंता

वित्त मंत्री ने अपने पत्र में दावा किया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विधानसभा से विधेयक पारित कर खनन क्षेत्रों में सेस लगाने की व्यवस्था की थी। इससे वित्तीय वर्ष 2026-27 तक करीब 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान था। उनका तर्क है कि MMDR कानून में प्रस्तावित संशोधन और नई धारा 9डी जोड़े जाने से राज्य इस बड़ी आमदनी से वंचित हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस संशोधन का असर विभिन्न कोयला कंपनियों पर राज्य की लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली पर भी पड़ सकता है। किशोर ने खनन से जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों का भी जिक्र करते हुए कहा कि खनन का आर्थिक लाभ केंद्र को मिलता है, जबकि झारखंड को विस्थापन, प्रदूषण और खराब स्वास्थ्य जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार को घेरा

बाबूलाल मरांडी ने अपने जवाबी पत्र में वित्त मंत्री के दावों को खारिज करते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि MMDR संशोधन किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में समान रूप से लागू होगा। उन्होंने पूछा, "यदि संशोधन पूरे देश के लिए है तो इससे केवल झारखंड की सरकार को परेशानी क्यों हो रही है?"

मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के राजस्व नुकसान के लिए सिर्फ केंद्र को दोष देना ठीक नहीं है। उन्होंने कोयले पर 450 रुपये और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त उपकर लगाने के राज्य सरकार के फैसले की आलोचना की। उनके मुताबिक, इस वजह से झारखंड के खनिज बाजार में अप्रतिस्पर्धी हो गए हैं, जिससे सिंहभूम क्षेत्र में कई खदानें और आयरन क्रशर बंद हो गए हैं और मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

ओडिशा का उदाहरण और वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में खनिज ब्लॉकों की नीलामी करके पिछले कुछ वर्षों में करीब 87,000 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया गया। इसके विपरीत, उन्होंने झारखंड में कई लौह अयस्क खदानों के बंद होने और कोल ब्लॉक चालू न होने पर सवाल उठाया। मरांडी ने दावा किया कि सही नीति से झारखंड भी हर साल 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त कमा सकता था।

उन्होंने राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर भी निशाना साधते हुए दावा किया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विभागों ने कुल बजट का एक प्रतिशत भी खर्च नहीं किया। साथ ही, उन्होंने बालू घाटों और पत्थर खदानों की नीलामी में देरी से हो रहे राजस्व नुकसान के लिए भी राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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