भारतीय नौसेना ने 39 देशों को प्रशिक्षित कर पूरी की संयुक्त समुद्री टास्क फोर्स की पहली कमान
भारतीय नौसेना ने बहरीन के मनामा में स्थित संयुक्त समुद्री बलों (Combined Maritime Forces - CMF) के एक महत्वपूर्ण टास्क फोर्स की कमान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
भारतीय नौसेना ने बहरीन के मनामा में स्थित संयुक्त समुद्री बलों (Combined Maritime Forces - CMF) के एक महत्वपूर्ण टास्क फोर्स की कमान सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर को नौसेना ने ‘संयुक्त टास्क फोर्स 154’ का नेतृत्व सौंप दिया, जो विशेष रूप से बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण के लिए गठित किया गया है।
यह पहली बार था जब भारतीय नौसेना को संयुक्त समुद्री बलों के किसी कार्यबल का नेतृत्व सौंपा गया था। भारत ने 11 फरवरी 2026 को इस टास्क फोर्स की कमान संभाली थी। यह ज़िम्मेदारी भारत को 2023 में CMF की पूर्ण सदस्यता मिलने के बाद मिली थी। उल्लेखनीय है कि भारत 2022 में इस 47 देशों वाले गठबंधन का एक सहयोगी भागीदार बना था।
प्रशिक्षण और प्रमुख उपलब्धियाँ
अपने कार्यकाल के दौरान, भारतीय नौसेना के नेतृत्व में टास्क फोर्स ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण गतिविधियाँ आयोजित कीं। इन गतिविधियों में 39 देशों के सैन्य कर्मियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें कुल मिलाकर 7,800 घंटे से अधिक का प्रशिक्षण दिया गया। कर्मियों की पेशेवर दक्षता बढ़ाने के लिए 20 अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए।
इस अवधि की एक प्रमुख उपलब्धि समुद्री डकैती और सशस्त्र लूटपाट पर विशेषज्ञों के आदान-प्रदान का पहला कार्यक्रम 'स्पार 2026' (SPAR 2026) रहा। इसके अलावा, दो प्रमुख ऑपरेशन—'कम्पास रोज 26-1' और 'सदर्न रेडीनेस 26-2'—भी सफलतापूर्वक आयोजित किए गए। प्रशिक्षण के लिए वर्चुअल और मिश्रित माध्यमों का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें CMF के अन्य कार्यबलों, भागीदार देशों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संस्थानों ने भी योगदान दिया।
भविष्य के लिए मजबूत सहयोग
इस कार्यकाल ने भविष्य में संयुक्त प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा में क्षमता निर्माण के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। कमान का यह सफल हस्तांतरण समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भारत और संयुक्त समुद्री बलों के बीच बढ़ते सहयोग का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भारत की बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करता है, जिससे एक प्रमुख सुरक्षा और प्रशिक्षण भागीदार के रूप में भारतीय नौसेना की भूमिका स्थापित होती है।
इनपुट: IANS



