गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

डिमेंशिया का खतरा: मध्य आयु की 3 आदतें तय कर सकती हैं बुढ़ापे में आपके मस्तिष्क का स्वास्थ्य

मध्य उम्र में अपनाई गई एक स्वस्थ जीवनशैली आपके मस्तिष्क को लंबे समय तक सेहतमंद रख सकती है और भूलने की बीमारी डिमेंशिया की शुरुआत को एक दशक से भी ज़्यादा समय के लिए टाल सकती है। समाचार एजेंसी IANS की…

डिमेंशिया का खतरा: मध्य आयु की 3 आदतें तय कर सकती हैं बुढ़ापे में आपके मस्तिष्क का स्वास्थ्य
(फोटो: IANS)

मध्य उम्र में अपनाई गई एक स्वस्थ जीवनशैली आपके मस्तिष्क को लंबे समय तक सेहतमंद रख सकती है और भूलने की बीमारी डिमेंशिया की शुरुआत को एक दशक से भी ज़्यादा समय के लिए टाल सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर 50-60 की उम्र में तीन प्रमुख जोखिमों को नियंत्रित कर लिया जाए, तो व्यक्ति औसतन 13 साल अधिक समय तक डिमेंशिया-मुक्त जीवन जी सकता है।

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यह अध्ययन अमेरिकी मेडिकल जर्नल 'न्यूरोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने इसके लिए 12,400 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का लगभग 26 वर्षों तक विश्लेषण किया। अध्ययन की शुरुआत में इन सभी लोगों की औसत उम्र 56 वर्ष थी।

तीन बड़े जोखिम कारक और उनका असर

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने मध्य आयु में उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), टाइप-2 मधुमेह (Type-2 Diabetes) और धूम्रपान (Smoking) से खुद को बचाए रखा, वे औसतन 30.1 वर्ष तक डिमेंशिया से मुक्त रहे। इसके विपरीत, जिन लोगों में ये तीनों जोखिम कारक मौजूद थे, उनमें यह अवधि घटकर केवल 17 वर्ष रह गई। इस तरह, दोनों समूहों के बीच डिमेंशिया-मुक्त जीवन में लगभग 13 वर्षों का एक बड़ा अंतर दर्ज किया गया।

मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए रोकथाम ज़रूरी

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और अमेरिका के एनवाईयू लैंगोन हेल्थ से जुड़े डॉ. जोसेफ कोरेश ने कहा, "डिमेंशिया की प्रक्रिया लक्षण सामने आने से कई वर्ष पहले ही शुरू हो जाती है। ऐसे में मिडिल एज में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना मस्तिष्क के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।"

विशेषज्ञों के मुताबिक, उच्च रक्तचाप और मधुमेह मस्तिष्क तक खून ले जाने वाली रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, धूम्रपान ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को बढ़ाकर सीधे मस्तिष्क की कोशिकाओं पर बुरा असर डालता है। इन जोखिमों से बचकर व्यक्ति अपनी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उम्र और आनुवंशिक कारणों के चलते डिमेंशिया को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके खतरे को काफी कम ज़रूर किया जा सकता है।

इनपुट: IANS

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