तमिलनाडु: तीसरे बच्चे पर भी 365 दिन की मैटरनिटी लीव, सरकार के फैसले पर छिड़ी राजनीतिक बहस
तमिलनाडु में अब महिला सरकारी कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी पूरे 365 दिन का मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) मिल सकेगा। टीवीके सरकार के इस नए फैसले ने राज्य की परिवार नियोजन नीति पर एक नई…
तमिलनाडु में अब महिला सरकारी कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी पूरे 365 दिन का मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) मिल सकेगा। टीवीके सरकार के इस नए फैसले ने राज्य की परिवार नियोजन नीति पर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है, जिस पर विभिन्न दलों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम की कुछ नेताओं ने सराहना की है तो कुछ ने इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
पहले राज्य में यह सुविधा सिर्फ पहले दो बच्चों के जन्म तक ही सीमित थी। परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीसरे बच्चे के लिए अवकाश की अवधि कम कर दी जाती थी। अब इस नीति में बदलाव किया गया है।
विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं
इस फैसले को तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के प्रमुख और एमएलसी एम. कोडंडाराम ने एक "ऐतिहासिक" कदम बताया है। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है... मुझे लगता है कि यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि सरकारें पारंपरिक रूप से परिवार नियोजन को बढ़ावा देती रही हैं।"
वहीं, मुंबई में शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए भी इसकी वजहों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु सरकार के इस फैसले के मकसद और वजह पर निश्चित रूप से सवाल उठेंगे। हालांकि, वे महिलाओं के लिए बेहतर प्रावधान करने की नैतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं, क्योंकि मैटरनिटी लीव जरूरी है। हम महिलाओं पर केंद्रित इस फैसले का स्वागत करते हैं।"
नीति पर डीएमके का पक्ष
इस बीच, डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की मूल नीति दो बच्चों की ही है। उन्होंने कहा, "असल में सरकार की पॉलिसी तो दो बच्चों की ही है। लेकिन तीसरे बच्चे के लिए हमने इसे कम कर दिया था क्योंकि हम नहीं चाहते कि किसी घर में तीसरा बच्चा हो। जाहिर है, ऐसा आबादी को कंट्रोल करने के लिए किया गया था... लेकिन यह सरकार आबादी को कंट्रोल नहीं करना चाहती। बस यही बात है।"
इनपुट: IANS



