बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाज़ार में लगातार 7वें दिन गिरावट, पश्चिम एशिया के तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को बाजार लगातार…

शेयर बाज़ार में लगातार 7वें दिन गिरावट, पश्चिम एशिया के तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर
(फोटो: IANS)

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को बाजार लगातार सातवीं बार गिरावट के साथ खुला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में दिखी खरीदारी ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की।

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बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 77,218.05 पर लगभग सपाट खुला, जो पिछले बंद 77,235.46 से 17.41 अंक (0.02%) कम था। दिन के कारोबार में यह 76,991.28 के निचले स्तर तक गया और 77,347.81 का उच्च स्तर भी छुआ। इसी तरह, एनएसई निफ्टी 50 भी 2.85 अंक (0.01%) की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर खुला। दिन के दौरान यह 24,065.10 के न्यूनतम और 24,172.85 के अधिकतम स्तर के बीच रहा। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 222.87 अंक (0.29%) गिरकर 77,012.59 पर और निफ्टी 74.00 अंक (0.31%) फिसलकर 24,080.90 पर कारोबार कर रहा था।

किन सेक्टर्स में रही तेजी और मंदी?

बुधवार के कारोबारी सत्र में सेक्टोरल प्रदर्शन मिला-जुला रहा। आईटी सेक्टर ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया, जहाँ निफ्टी आईटी सूचकांक में 0.82% की बढ़त देखी गई। इसके अलावा एफएमसीजी, रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे क्षेत्रों में भी मामूली तेजी दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखा, जहाँ निफ्टी मेटल 0.35% और निफ्टी ऑटो 0.14% टूटा। हेल्थकेयर और फार्मा सूचकांकों में भी हल्की कमजोरी दर्ज की गई। व्यापक बाजारों की बात करें तो निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप में भी क्रमशः 0.39% और 0.37% की गिरावट रही।

बाजार में गिरावट के पीछे क्या हैं कारण?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा कमजोरी के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो पिछले तीन हफ्तों का उच्चतम स्तर है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के संकेत से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर है, जिससे वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इन वजहों से एशियाई बाजारों पर भी दबाव देखने को मिला।

भारतीय बाजार के लिए आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूती दिखा रहा है। इसके पीछे भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, बेहतर जीडीपी वृद्धि की संभावनाएं और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी को श्रेय दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश का एक अवसर हो सकती है, खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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