वैवाहिक बलात्कार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शादी किसी महिला से सहमति का अधिकार नहीं छीन सकती
वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब अंतिम दौर में है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता…
वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब अंतिम दौर में है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह किसी महिला की शारीरिक स्वतंत्रता और सहमति देने के संवैधानिक अधिकार को खत्म नहीं कर सकता। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने केंद्र सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले की अंतिम सुनवाई अगले महीने के लिए तय कर दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ शादी के आधार पर किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने की कानूनी छूट दी जा सकती है? पीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल पति-पत्नी के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला की गरिमा, स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ा है।
सरकार का पक्ष और कानूनी चुनौती
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि यह फैसला करना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि अदालत के। उन्होंने बताया कि 2023 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) बनाते समय इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया था। मेहता के अनुसार, विवाह के भीतर यौन संबंधों को अपराध मानना या न मानना एक नीतिगत और सामाजिक निर्णय है, जिसे संसद को ही लेना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने भारतीय न्याय संहिता के उस प्रावधान को चुनौती दी है, जो बालिग पत्नी के साथ पति द्वारा उसकी सहमति के बिना बनाए गए यौन संबंध को बलात्कार की परिभाषा से बाहर रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अंतिम सुनवाई के दौरान इस कानूनी अपवाद की संवैधानिक वैधता की विस्तार से जांच की जाएगी।
अंतिम सुनवाई अगले महीने
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का हलफनामा रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया है कि इस मामले को तीन सप्ताह बाद बुधवार और गुरुवार को अंतिम बहस के लिए सूचीबद्ध किया जाए। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत इस महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक प्रश्न पर अपना फैसला सुनाएगी, जिसका प्रभाव देश में विवाह, सहमति और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनों पर पड़ सकता है।
इनपुट: IANS



