मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद नाराज़, माफी न मांगने पर दी आंदोलन की चेतावनी
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति पर दिए गए बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। शंकराचार्य ने राहुल गांधी पर हिंदू धर्मग्रं…
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति पर दिए गए बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। शंकराचार्य ने राहुल गांधी पर हिंदू धर्मग्रंथ में कही गई बातों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि राहुल गांधी अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगते हैं, तो वह कांग्रेस के खिलाफ 'हिंदू बहिष्कार' की मुहिम चलाने पर विचार कर सकते हैं।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार मनुस्मृति के खिलाफ तो बोलते हैं, लेकिन अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस उदाहरण पेश नहीं करते। उन्होंने बताया कि जब राहुल ने संसद में मनुस्मृति पर गंभीर आरोप लगाए थे, तो उन्होंने पूछा था कि ये बातें ग्रंथ में कहां लिखी हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसी वजह से उन्होंने राहुल गांधी के विचारों पर सवाल उठाया है।
महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा का मुद्दा
शंकराचार्य ने पुणे में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में दिए गए राहुल गांधी के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें मनुस्मृति को महिलाओं की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया गया था। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कही गई बातों को आज के समय में सिर्फ 'बंधन' के रूप में देखना सही नहीं है।
उन्होंने तर्क दिया, "जब मनुस्मृति में पिता द्वारा बेटी की रक्षा की बात कही जाती है तो इसे महिला की स्वतंत्रता छीनने के रूप में नहीं देखा जाए।" शंकराचार्य के अनुसार, परिवार में एक-दूसरे की जिम्मेदारी निभाना भारतीय समाज की पुरानी व्यवस्था का हिस्सा रहा है और किसी की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेना उसे बंधन में डालना नहीं है। उन्होंने बुजुर्ग मां की देखभाल करने वाले बेटे का उदाहरण देते हुए पूछा कि इसे स्वतंत्रता के खिलाफ कैसे माना जा सकता है।
"धर्मग्रंथों का अपमान स्वीकार नहीं"
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि उनकी राहुल गांधी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, और न ही वे किसी राजनीतिक नेता के विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि उनका विरोध केवल उन बयानों से है, जिन्हें वह सनातन धर्म और उसके ग्रंथों का अपमान मानते हैं। शंकराचार्य ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर राहुल गांधी को एक पत्र भी भेजा है।
उन्होंने कहा, "किसी भी धर्म के ग्रंथ के बारे में बोलने से पहले उसके मूल संदर्भ और अर्थ को समझना जरूरी है।" शंकराचार्य ने राहुल गांधी को इस विषय पर बैठकर चर्चा करने का प्रस्ताव भी दिया, ताकि यदि उनके मन में कोई भ्रम है तो उसे दूर किया जा सके। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को सलाह दी कि धार्मिक आस्था के विषय पर मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
इनपुट: IANS



