अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे माता-पिता, राहुल गांधी ने की मुलाकात
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गुहार लगाते हुए उनके माता-पिता बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस दौरान लोकसभा में नेता…
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गुहार लगाते हुए उनके माता-पिता बुधवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात कर न्याय की लड़ाई में हरसंभव मदद का भरोसा दिया। यह मामला 2022 का है जब उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘वीआईपी’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम जरूर मिला।" उन्होंने आगे लिखा, "जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है, उस महिला-विरोधी भाजपा से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती। आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, इंडिया गेट पर बैठे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं - उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी।"
उत्तराखंड सरकार का पक्ष
वहीं, उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाना इस बात का सबूत है कि सरकार ने "पहले दिन से ही पूरी गंभीरता के साथ काम किया" ताकि अपराधियों को सजा मिल सके।
बयान के मुताबिक, मामले में आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था और निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। सरकार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई।
जांच और कानूनी प्रक्रिया
उत्तराखंड सरकार ने अपने बयान में जांच प्रक्रिया का भी ब्योरा दिया। बताया गया कि लगभग 100 गवाहों के बयानों के साथ 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के कारण आरोपियों की जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज हुईं और अंततः उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सरकार ने यह भी कहा कि परिवार की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए उनकी मांग पर तीन बार लोक अभियोजकों को बदला गया और जब माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग की, तो मुख्यमंत्री ने उसके भी आदेश दिए।
इनपुट: IANS



