रियल एस्टेट धोखाधड़ी: ओशन सेवन बिल्डटेक की 136 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति ED ने ज़ब्त की
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट कंपनी ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट कंपनी ओशन सेवन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड (OSBPL) और उसके प्रमोटरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कंपनी की 136.42 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ ज़ब्त कर ली गई हैं। यह मामला प्लॉट खरीदारों से करोड़ों रुपये जमा करने और उन्हें धोखा देने के आरोपों से जुड़ा है।
ईडी की जांच दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान पुलिस द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव के खिलाफ दर्ज की गई कई FIR पर आधारित है। इन FIR में कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को लेकर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
ज़ब्त की गई संपत्तियों का ब्योरा
ईडी द्वारा ज़ब्त की गई संपत्तियों में जयपुर के बिलोंची गांव और कोटपूतली-बहरोड़ में ज़मीन, गुरुग्राम के सेक्टर-102 में एक आवासीय प्लॉट और कंपनी, उसके प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और उनकी पत्नी सुनीता स्वराज के पाँच बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। बैंक खातों में मौजूद 69.06 लाख रुपये की राशि को मिलाकर इस मामले में अब तक ज़ब्त की गई कुल संपत्ति का मूल्य लगभग 188 करोड़ रुपये हो गया है। इससे पहले भी ईडी ने इसी मामले में करीब 51.57 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की थी।
क्या है पूरा मामला?
जांच में सामने आया कि OSBPL ने दिसंबर 2006 से मार्च 2015 के बीच राजस्थान में अपने चार प्रोजेक्ट्स के लिए प्लॉट खरीदारों से 118 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई थी। ये प्रोजेक्ट्स जयपुर के बिलोंची में 'एम्बर गार्डन' और कोटपूतली-बहरोड़ में 'कोट रेजिडेंसी', 'कोट फार्म्स' और 'कोट इंडस्ट्रियल एस्टेट' थे।
कंपनी ने खरीदारों से वादा किया था कि इन प्रोजेक्ट्स को विकसित किया जाएगा और तीन से चार साल के भीतर उन्हें प्लॉट का कब्जा सौंप दिया जाएगा। हैरानी की बात यह है कि 'एम्बर गार्डन' प्रोजेक्ट के लिए दिसंबर 2006 में ही पैसे लेने शुरू कर दिए गए थे, जबकि कंपनी ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में प्रोजेक्ट के नक्शे के लिए आवेदन तक नहीं किया था।
विकसित नहीं हुए प्रोजेक्ट्स
JDA और राजस्व अधिकारियों के साइट निरीक्षण से पता चला कि ये प्रोजेक्ट्स कभी विकसित ही नहीं हुए और ज़मीन का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है। जिन खरीदारों ने पूरी रकम चुका दी थी और कई मामलों में रजिस्ट्री और कब्ज़ा पत्र भी हासिल कर लिए थे, उन्हें भी कभी अपने प्लॉट पर कब्ज़ा नहीं मिला। फंड का इस्तेमाल प्रोजेक्ट विकसित करने के बजाय दूसरे कामों में किया गया, जैसे गुरुग्राम में ऑफिस खरीदना और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए एडवांस देना। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि FIR दर्ज होने के बाद करीब 39 एकड़ ज़मीन आरोपियों ने अपने करीबियों के नाम कर दी थी, जिसे अब ज़ब्त कर लिया गया है।
इनपुट: IANS



