रिश्वतखोरी का बड़ा मामला: गोला-बारूद बनाने वाली सरकारी कंपनी के निदेशक सहित 3 लोग CBI की गिरफ्त में
सरकारी ठेके देने के एवज में रिश्वत लेने के एक गंभीर मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गिरफ्तार होने वालों में रक्षा क्षेत्र की…
सरकारी ठेके देने के एवज में रिश्वत लेने के एक गंभीर मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गिरफ्तार होने वालों में रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) के एक कार्यकारी निदेशक, उनके भाई और एक निजी रक्षा कंपनी के प्रमोटर शामिल हैं। CBI ने मंगलवार को यह कार्रवाई की और बुधवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी।
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी अनिल कुमार हैं, जो पुणे स्थित म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक के पद पर तैनात थे। CBI ने उनके खिलाफ 12 अक्टूबर को मामला दर्ज किया था। आरोप है कि उन्होंने सरकारी ठेकेदारों और वेंडरों को फायदा पहुँचाने के लिए एक आपराधिक गठजोड़ बनाया था और इसके बदले में रिश्वत की मांग कर रहे थे।
छापेमारी में करोड़ों की नकदी बरामद
मामले के सिलसिले में CBI ने कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि पुणे में अनिल कुमार के ठिकाने से 1.73 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई। इसके अलावा, मैसूरु, बेंगलुरु और दिल्ली में अन्य आरोपियों से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी की गई, जहाँ से करीब 50 लाख रुपये नकद और कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। इस तरह, तलाशी के दौरान बरामद की गई कुल नकदी लगभग 2.23 करोड़ रुपये है।
कौन हैं अन्य दो आरोपी?
CBI के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए अन्य दो आरोपियों की पहचान मेसर्स एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ और निदेशक/प्रमोटर आशीष कंसल और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार के भाई बी. हर्षवर्धन के रूप में हुई है। एजेंसी अब सरकारी अधिकारी और निजी ठेकेदारों के बीच कथित सांठगांठ की गहराई से जांच कर रही है। म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड रक्षा मंत्रालय का एक सार्वजनिक उपक्रम है, जो सेना के लिए गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने का काम करता है। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



