गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पराली संकट: सरकारी कोशिशों से हरियाणा और यूपी में मामले घटे, पर दिल्ली की हवा पर खतरा बरकरार

जैसे-जैसे उत्तर भारत में धान की कटाई का मौसम ज़ोर पकड़ रहा है, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के दौरान होने वाले भीषण वायु प्रदूषण की चिंता फिर से बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS…

पराली संकट: सरकारी कोशिशों से हरियाणा और यूपी में मामले घटे, पर दिल्ली की हवा पर खतरा बरकरार
(फोटो: IANS)

जैसे-जैसे उत्तर भारत में धान की कटाई का मौसम ज़ोर पकड़ रहा है, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के दौरान होने वाले भीषण वायु प्रदूषण की चिंता फिर से बढ़ गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस प्रदूषण का एक बड़ा कारण पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना है, जिससे निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं।

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हालांकि, हालिया रिपोर्टों में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। इस साल 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले हरियाणा में 53.3% और उत्तर प्रदेश में लगभग 32% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इन घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है, जो चिंता का विषय बना हुआ है।

पराली जलाने के गंभीर परिणाम

जब किसान धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए खेत जल्दी तैयार करने के मकसद से पराली जलाते हैं, तो इससे पर्यावरण और सेहत को भारी नुकसान होता है। एक अनुमान के मुताबिक, एक टन पराली जलाने से वायुमंडल में लगभग 3 किलोग्राम कण पदार्थ (PM), 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 199 किलोग्राम राख और 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड जैसे ज़हरीले प्रदूषक फैलते हैं। इससे न केवल हवा की गुणवत्ता गिरती है बल्कि ज़मीन की उपजाऊ शक्ति भी कम होती है।

सरकारी योजनाएं और चुनौतियां

इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार 2018 से 'फसल अवशेष प्रबंधन' (CRM) योजना चला रही है। IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत 2018-19 से 2025-26 के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को कुल ₹4,266.47 करोड़ जारी किए गए हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए भी ₹592.57 करोड़ का आवंटन हुआ है, जिसमें से ₹430.87 करोड़ दिए जा चुके हैं।

इन पैसों से किसानों को मशीनें और वैकल्पिक प्रबंधन तकनीकें उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तक 3.23 लाख से अधिक मशीनें दी जा चुकी हैं और 41,900 से ज़्यादा कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित किए गए हैं, जहां से छोटे किसान भी मशीनरी किराए पर ले सकते हैं। हालांकि, आवंटित धनराशि का धीमा उपयोग एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार अब बायोमास और बायोफ्यूल जैसे स्थायी समाधानों पर भी ज़ोर दे रही है, ताकि पराली को जलाने के बजाय ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सके।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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