क्षेत्रीय शांति के लिए सार्क को पुनर्जीवित करें: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अपील
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) में लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने की एक नई पहल हुई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने क्षेत्रीय शांति और…
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) में लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने की एक नई पहल हुई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने क्षेत्रीय शांति और सहयोग के हित में इस संगठन को फिर से सक्रिय करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने सदस्य देशों से आपसी मतभेदों को बातचीत के ज़रिए सुलझाने का आग्रह किया है।
मालदीव की आज़ादी के 61 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति मुइज्जू ने यह महत्वपूर्ण आह्वान किया। उन्होंने सार्क समूह के भीतर मौजूदा रुकावटों का उल्लेख करते हुए कहा कि मालदीव इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है। उनका यह संबोधन 43 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 113 राजनयिकों की उपस्थिति में हुआ, जहाँ उन्होंने अपनी सरकार की विदेश नीति पर भी प्रकाश डाला।
बांग्लादेश का भी मिला समर्थन
मालदीव से पहले इसी महीने की शुरुआत में बांग्लादेश ने भी सार्क को पुनर्जीवित करने का समर्थन किया था। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने संगठन की क्षमता और प्रदर्शन के बीच के अंतर को पाटने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कुछ ठोस कदम भी सुझाए थे, जिनमें संगठन की कार्यान्वयन क्षमता को मज़बूत करना, वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाना और असरदार विशेष तंत्र विकसित करना शामिल है। सुश्री ओबैद ने यह भी बताया था कि बांग्लादेश सदस्य देशों के साथ चर्चा के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और मंत्री परिषद के विशेष सत्र की संभावनाएं तलाश रहा है।
क्यों रुका है सार्क?
सार्क एक क्षेत्रीय राजनीतिक और आर्थिक संगठन है, जिसमें आठ सदस्य देश—भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका—शामिल हैं। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय एकीकरण और विकास को बढ़ावा देना है। हालांकि, हाल के वर्षों में यह संगठन काफी हद तक निष्क्रिय हो गया है, जिसका मुख्य कारण पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देना बताया जाता है।
इनपुट: IANS



