कर्नाटक अवैध खनन मामला: ED ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में 2.10 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के चर्चित बेलेकेरी पोर्ट अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक के चर्चित बेलेकेरी पोर्ट अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने 2 सितंबर को मेसर्स अक्षता मिनरल्स और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत लगभग 2.10 करोड़ रुपये के आवासीय भूखंडों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का आदेश जारी किया है।
यह मामला उस व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर शुरू किया गया था। कर्नाटक का बेलेकेरी पोर्ट अवैध खनन घोटाले का केंद्र बनकर उभरा था, जिसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अक्टूबर 2013 में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच इसी FIR पर आधारित है।
जांच में हुआ अवैध व्यापार का खुलासा
ईडी की जांच में मेसर्स एसवीके मिनरल्स नामक एक पार्टनरशिप फर्म की भूमिका सामने आई, जो लौह अयस्क के व्यापार में शामिल थी। जांच में पाया गया कि फर्म ने 1 जनवरी 2009 से 31 मई 2010 के बीच अवैध रूप से हासिल किए गए लौह अयस्क को कई कंपनियों को बेचा।
एजेंसी ने पाया कि मेसर्स भारत ओर्स एंड मिनरल्स के माध्यम से मेसर्स एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को भेजे गए 48,471 मीट्रिक टन लौह अयस्क के लिए कोई वैध परमिट नहीं था। इसी तरह, यह भी साबित हुआ कि एसवीके मिनरल्स ने मेसर्स अरशद एक्सपोर्ट्स को 56,081.43 मीट्रिक टन अवैध अयस्क की आपूर्ति की, जिसे बाद में चीन को निर्यात कर दिया गया।
अवैध कमाई से खरीदी गई संपत्ति
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, एसवीके मिनरल्स के पार्टनर्स ने इस अवैध व्यापार से हुई कमाई का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में किया। इसी मुनाफे को 'अपराध की आय' मानते हुए ईडी ने PMLA की धारा 5(1) के तहत श्यामराज सिंह और बी.एस. नंदकुमार सिंह के नाम पर मौजूद चार अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



