रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ईरान ने अमेरिका-इज़रायल पर 'पर्यावरणीय युद्ध अपराध' का लगाया आरोप, अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग

ईरान ने अमेरिका और इज़रायल पर अपने तेल शोधन कारखानों और ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों के ज़रिए पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, तेहरान में आयोजित एक…

ईरान ने अमेरिका-इज़रायल पर 'पर्यावरणीय युद्ध अपराध' का लगाया आरोप, अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग
(फोटो: IANS)

ईरान ने अमेरिका और इज़रायल पर अपने तेल शोधन कारखानों और ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों के ज़रिए पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, तेहरान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे 'इकोसाइड' यानी पर्यावरणीय तबाही करार देते हुए इसके खिलाफ ठोस वैश्विक कार्रवाई की मांग की है।

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'इकोसाइड: द साइलेंट वॉर क्राइम' नामक इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि ऐसे हमलों से हवा, पानी और मिट्टी प्रदूषित हुई है, जिसका सीधा असर खाद्य श्रृंखला पर पड़ सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले देशों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

पर्यावरण विनाश युद्ध अपराध से भी बड़ा

ईरानी विदेश मंत्री ने 'इकोसाइड' की तुलना 'जेनोसाइड' (नरसंहार) से करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक युद्ध अपराध नहीं, बल्कि उससे भी बड़ा गुनाह है। उन्होंने कहा, "पर्यावरण पूरी मानवता की साझा धरोहर है। इसे देशों की आपसी प्रतिस्पर्धा का मैदान या अल्पकालिक आर्थिक और सैन्य हितों का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए।"

मेहर न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अराघची ने तेहरान के पास तेल भंडारों में लगी आग का ज़िक्र करते हुए कहा कि इससे खतरनाक पदार्थ निकले, जिन्होंने पर्यावरण को दूषित किया। उन्होंने तेहरान में हुई 'काली बारिश' की घटनाओं का भी उल्लेख किया और बताया कि मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने भी तेल संयंत्रों पर हमलों से खतरनाक रासायनिक यौगिकों के फैलने की पुष्टि की थी।

क्षेत्रीय संघर्षों का पर्यावरण पर असर

अराघची ने सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि अन्य जगहों पर भी युद्ध के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में जैतून के बागों का विनाश हुआ और पानी-मिट्टी दूषित हो गई, जो एक अभूतपूर्व पर्यावरणीय क्षति है। इसी तरह लेबनान में आग लगने से जंगल और हज़ारों जैतून के पेड़ नष्ट हो गए।

उन्होंने कहा कि युद्ध से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का असर संघर्ष खत्म होने के दशकों बाद तक बना रहता है, जिससे पानी, मिट्टी, हवा, जंगल, खेती की ज़मीन और जैव विविधता को गंभीर क्षति पहुँचती है।

ईरान की तीन प्रमुख मांगें

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे। पहला, पर्यावरण को होने वाले गंभीर नुकसान से निपटने के लिए एक मज़बूत कानूनी ढाँचा और स्पष्ट मानक विकसित किए जाएं। दूसरा, संघर्षों के दौरान होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से दस्तावेजीकरण हो। और तीसरा, क्षतिग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से बहाल करने और प्रभावित देशों की मदद के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाए। अराघची ने साफ किया कि ईरान 'इकोसाइड' को एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता देने का पुरज़ोर समर्थन करता है।

इनपुट: IANS

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