दिशा सालियान मामले में नाम घसीटे जाने पर आदित्य ठाकरे का पलटवार, कहा- 'मैं उनसे कभी नहीं मिला'
शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान मामले में अपना नाम जोड़े जाने को एक राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन का प्रयास बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर साफ किया है कि वे दिशा…
शिवसेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान मामले में अपना नाम जोड़े जाने को एक राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन का प्रयास बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर साफ किया है कि वे दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और न ही उन्हें जानते थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ठाकरे ने इस पूरे मामले को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित एक झूठा अभियान करार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा, "अफवाहों का धुंध फैलाना बंद करने के लिए एक बार फिर से केवल और केवल तथ्य बता रहा हूं! मैं दिशा सालियान से कभी नहीं मिला हूं और न ही उनसे मेरी कोई पहचान थी।" उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 सालों से बिना किसी सबूत के जानबूझकर उनका नाम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से जोड़ा जा रहा है।
जांच और मीडिया ट्रायल पर क्या बोले ठाकरे?
आदित्य ठाकरे ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि आधिकारिक एजेंसियों को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या चरित्र हनन के नए सिरे से जांच करने देना चाहिए। उन्होंने टीवी चैनलों पर होने वाली बहसों और मीडिया ट्रायल की आलोचना करते हुए कहा कि शोर मचाने से सच नहीं बदल सकता। ठाकरे ने चेतावनी देते हुए कहा, "जिन्हें लगता है कि इस तरह के चरित्र हनन और झूठे प्रचार के रास्ते से आप हमें चुप करा सकते हैं, तो यह आपका भ्रम है। सत्य के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी!"
क्या है ताजा विवाद की वजह?
आदित्य ठाकरे की यह प्रतिक्रिया दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान और उनके वकील के हालिया दावों के बाद आई है। दो दिन पहले सतीश सालियान ने दावा किया था कि उनके पास आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, सचिन वाजे, परमबीर सिंह और रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
वहीं, उनके वकील निलेश ओझा ने आरोप लगाया था कि दिशा की हत्या गैंगरेप के बाद की गई थी, क्योंकि उनके पास आदित्य ठाकरे के समूह से जुड़े ड्रग्स और बाल तस्करी के सबूत थे, जो उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत को दिए थे। ओझा ने यह भी दावा किया कि दिशा का मोबाइल 9 से 17 जून 2020 तक आरोपियों के कब्जे में था। इसी बयान के आधार पर सीबीआई ने मामले में FIR दर्ज की है।
इनपुट: IANS



