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महाराष्ट्र: आदिवासी स्कूलों की बदहाली पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का अभियान, 2 साल में 590 बच्चों की मौत का दावा

महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी और बच्चों की मौत के गंभीर मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने दावा किया…

महाराष्ट्र: आदिवासी स्कूलों की बदहाली पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का अभियान, 2 साल में 590 बच्चों की मौत का दावा
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी और बच्चों की मौत के गंभीर मामलों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि पिछले दो वर्षों में राज्य के इन स्कूलों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है, जिसके बाद उन्होंने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने की घोषणा की है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिपके ने आरोप लगाया कि आदिवासी बच्चों को स्कूलों में न तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है और न ही पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था या दवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों की इमारतों और वहां मौजूद सुविधाओं की हालत इतनी खराब है कि वे बच्चों के पढ़ने के लिए उपयुक्त ही नहीं हैं।

स्कूलों में असुरक्षित माहौल और सुविधाओं का अभाव

अभिजीत दिपके ने बच्चों के रहने की व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि कई जगहों पर छात्रों को बिस्तर तक नसीब नहीं हैं और उन्हें जमीन पर सोना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसी असुरक्षित परिस्थितियों के कारण बच्चों को सांप के काटने जैसी घटनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। दिपके ने सवाल उठाया कि अगर दो सालों में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है, तो इसके कारणों और स्कूलों की व्यवस्था की गंभीरता से जांच क्यों नहीं की जा रही है?

बालाघाट क्षेत्र में मौतों का चौंकाने वाला आंकड़ा

पार्टी ने विशेष रूप से बालाघाट क्षेत्र की चिंताजनक स्थिति का जिक्र किया। दिपके के अनुसार, वहां पिछले तीन महीनों में ही 30 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्होंने स्थानीय लोगों के हवाले से यह भी दावा किया कि जनवरी से अब तक 100 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर सरकारी लापरवाही और चिकित्सा व्यवस्था की कमी से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि सिर्फ स्कूलों में बच्चों का नामांकन करा देना ही काफी नहीं है, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हें सुरक्षित माहौल, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधा और अच्छी शिक्षा भी मिले। दिपके ने कहा कि आदिवासी बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकें, इसी उद्देश्य से उनकी पार्टी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए यह अभियान शुरू कर रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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