पुणे: आरोपियों से मारपीट और सरेआम अपमान के आरोप में 13 पुलिसकर्मियों पर FIR, मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट बनी आधार
पुणे में 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित तौर पर हिरासत में आरोपियों के साथ मारपीट करने, उन्हें अवैध रूप से रोकने और सरेआम अपमानित करने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। समाचार एजेंसी IANS…
पुणे में 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित तौर पर हिरासत में आरोपियों के साथ मारपीट करने, उन्हें अवैध रूप से रोकने और सरेआम अपमानित करने जैसे गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (MSHRC) की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद हुई है।
यह एफआईआर 24 सितंबर को अपराध अन्वेषण विभाग (CID) में तैनात पुलिस उप अधीक्षक संकेत सतीश गोसावी की शिकायत पर भारती विद्यापीठ पुलिस थाने में दर्ज की गई। जिन पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया है, उनमें वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील, दो पुलिस उप-निरीक्षक, एक हवलदार और नौ अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।
क्या हैं पूरा मामला और आरोप?
यह मामला भारती विद्यापीठ पुलिस थाने में दर्ज एक अपराध से जुड़ा है, जिसमें चार आरोपी 5 जुलाई को दोपहर करीब 3 बजे खुद थाने पहुंचे थे। हालांकि, उनकी औपचारिक गिरफ्तारी उसी दिन रात 10:30 बजे दिखाई गई। एक पीड़ित दीपक नेटके ने मानवाधिकार आयोग को दिए बयान में आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद वरिष्ठ निरीक्षक मानसिंग पाटील और अन्य पुलिसकर्मियों ने उन्हें और बाकी तीन आरोपियों को पट्टे से हाथ-पैरों पर पीटा।
आयोग की रिपोर्ट के हवाले से एफआईआर में कहा गया ہے कि 7 जुलाई को शाम करीब 5:30 बजे चारों आरोपियों को लेक टाउन के पास एसआरए कॉलोनी ले जाया गया। जांच में सामने आई वीडियो क्लिप्स से पता चलता है कि वहां पुलिसकर्मियों ने उन्हें घुटनों के बल बैठाया, सड़क पर चलने को मजबूर किया और लाठी-डंडों से पीटा। इसके अलावा, उन्हें नागरिकों के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगने के लिए भी विवश किया गया।
जांच में मिलीं कई खामियां
मानवाधिकार आयोग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 7 जुलाई को आरोपियों को एसआरए कॉलोनी ले जाने का कोई भी रिकॉर्ड पुलिस स्टेशन की जनरल डायरी या पुलिस वाहन के लॉगबुक में दर्ज नहीं था। वहीं, कुछ पुलिसकर्मियों ने आयोग के सामने घटनास्थल पर अपनी मौजूदगी स्वीकार की और वीडियो में दिख रहे अधिकारी की पहचान वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मानसिंग पाटील के रूप में की।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आरोपियों की मेडिकल जांच पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि मारपीट के आरोपों के बावजूद मेडिकल प्रमाणपत्रों में चोटों का कोई जिक्र नहीं था, जबकि एक आरोपी सरफराज शेख के अंगझड़ती पंचनामा में उसके हाथ की उंगली पर चोट का उल्लेख था।
इन पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ केस
मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के आधार पर, जिन 13 पुलिसकर्मियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, उनमें वरिष्ठ निरीक्षक मानसिंग पाटील, उप-निरीक्षक आण्णा मधुकर दराडे व निलेश राजेंद्र मोकाशी, हवलदार सुनील दादा हनवते और नौ अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



