शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अक्टूबर में भारतीय अर्थव्यवस्था में बहार, निर्यात और घरेलू मांग ने दी कारोबारी गतिविधियों को नई रफ़्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अक्टूबर का महीना अच्छी खबर लेकर आया है। देश के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों ने चार महीने की सबसे तेज़ रफ़्तार पकड़ी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…

अक्टूबर में भारतीय अर्थव्यवस्था में बहार, निर्यात और घरेलू मांग ने दी कारोबारी गतिविधियों को नई रफ़्तार
(फोटो: IANS)

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अक्टूबर का महीना अच्छी खबर लेकर आया है। देश के निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों ने चार महीने की सबसे तेज़ रफ़्तार पकड़ी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज़ी के पीछे घरेलू बाज़ार की मज़बूत मांग और विदेशी ऑर्डरों में आया उछाल प्रमुख कारण रहे हैं। यह संकेत एचएसबीसी द्वारा जारी ताज़ा 'फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स' (PMI) आंकड़ों से मिले हैं।

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पीएमआई डेटा एक तरह से अर्थव्यवस्था की सेहत का थर्मामीटर माना जाता है। इसमें 50 से ऊपर का कोई भी आंकड़ा कारोबारी गतिविधियों में विस्तार यानी बढ़ोतरी को दर्शाता है। अक्टूबर में विनिर्माण और सेवा, दोनों क्षेत्रों की संयुक्त गतिविधियों को मापने वाला एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स बढ़कर 56.7 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 55.9 पर था। यह इस साल जून के बाद दर्ज की गई सबसे तेज़ वृद्धि है।

निर्यात मांग में रिकॉर्ड तेज़ी

आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों ने बाज़ार के सुधरते हालातों और नए ऑर्डरों में लगातार बढ़ोतरी की बात कही है। ख़ासतौर पर विदेशी बाज़ार से आई मांग बेहद मज़बूत रही। निर्यात ऑर्डरों में पिछले छह महीनों की सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई।

एचएसबीसी की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री, प्रांजुल भंडारी ने इस पर विस्तार से बताया। उन्होंने कहा, "विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और नए ऑर्डरों की वृद्धि सितंबर के स्तर के आसपास बनी रही, लेकिन इसके पीछे सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्यात मांग में आई तेजी रही। जून 2025 के बाद पहली बार निर्यात ऑर्डरों में इतनी मजबूत वृद्धि देखने को मिली है।" बढ़ती मांग को देखते हुए निर्माताओं ने कच्चे और तैयार, दोनों तरह के माल का स्टॉक भी बढ़ाया है।

महंगाई और रोज़गार का हाल

महंगाई के मोर्चे पर भी कुछ राहत भरे संकेत हैं। रिपोर्ट बताती है कि उत्पादन की लागत और बिक्री की कीमतों पर दबाव लगातार कम हो रहा है।

हालांकि, रोज़गार के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी मिली-जुली है। निजी क्षेत्र में नई नौकरियों की रफ्तार धीमी पड़ी है। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने, जो लगातार नौ महीनों से भर्तियां कर रही थीं, अक्टूबर में लगभग कोई नई भर्ती नहीं की। दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां तो बढ़ीं, लेकिन यह वृद्धि बहुत सीमित रही। कई कंपनियों का मानना है कि उनका मौजूदा स्टाफ काम का बोझ संभालने के लिए पर्याप्त है, इसलिए वे बड़े पैमाने पर नई भर्तियां नहीं कर रही हैं।

इसके अलावा, रिपोर्ट में एक और सकारात्मक पहलू सामने आया है। कंपनियों के पास लंबित पड़े काम (बैकलॉग) में लगातार तीसरी बार कमी आई है, जो पिछले साढ़े छह साल में सबसे तेज गिरावट है। यह दिखाता है कि कंपनियां पहले के मुकाबले ज़्यादा कुशलता से काम पूरा कर रही हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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