DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को मंत्री आधव अर्जुन के ₹1 करोड़ मानहानि मामले में जवाब देने के लिए और समय मिला
तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन द्वारा दायर किए गए एक करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को अपना जवाब दाखिल करने के…
तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुन द्वारा दायर किए गए एक करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 21 सितंबर तक का समय दे दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन की ओर से और समय की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
यह पूरा मामला एम.के. स्टालिन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक बयान का हवाला देते हुए दावा किया था कि जॉन ब्रिटो नामक व्यक्ति मंत्री आधव अर्जुन का रिश्तेदार है। स्टालिन ने आरोप लगाया था कि यही जॉन ब्रिटो 258 करोड़ रुपये के ड्रग तस्करी मामले का कथित मास्टरमाइंड है।
मंत्री का इनकार और कानूनी कार्रवाई
मंत्री आधव अर्जुन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए स्टालिन के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि ईडी द्वारा बताए गए जॉन ब्रिटो से उनका कोई संबंध नहीं है। अर्जुन ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने उनकी छवि खराब करने के इरादे से यह पोस्ट किया था।
अपनी कानूनी कार्रवाई में मंत्री ने न केवल एक करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की, बल्कि अदालत से यह भी आग्रह किया कि वह एम.के. स्टालिन और DMK आईटी विंग को उन सभी पोस्ट को हटाने का निर्देश दे, जो उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले थे।
अदालती कार्यवाही
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गोविंदराजन थिलाकवथी ने पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और DMK आईटी विंग को मंत्री आधव अर्जुन की याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। जब यह मामला फिर से सुनवाई के लिए आया, तो स्टालिन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विल्सन ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर के लिए तय कर दी।
इनपुट: IANS



