मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

भारत रक्षा आयातक से निर्यातक बनने की ओर: रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए बताई नई रणनीति

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत अब रक्षा उत्पादों के आयातक की भूमिका से निकलकर एक निर्यातक बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। नई दिल्ली में आयोजित डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक…

भारत रक्षा आयातक से निर्यातक बनने की ओर: रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता के लिए बताई नई रणनीति
(फोटो: IANS)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत अब रक्षा उत्पादों के आयातक की भूमिका से निकलकर एक निर्यातक बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। नई दिल्ली में आयोजित डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक 'विमर्श 2026' में बोलते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश में नवाचार के नए ध्वजवाहक बनकर उभरे ये छोटे उद्यम नए विचारों और प्रौद्योगिकियों को जन्म दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक ऐसा ढांचा तैयार किया है, जिससे स्टार्टअप और MSME सीधे उसकी प्रयोगशालाओं के साथ संवाद कर सकते हैं और डीप टेक जैसी विशिष्ट तकनीकों पर काम करने का अवसर पा सकते हैं।

साझेदारी का नया स्वरूप

राजनाथ सिंह ने कहा कि अब डीआरडीओ और उद्योगों की साझेदारी सिर्फ़ उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे रिसर्च, डिज़ाइन, परीक्षण, प्रमाणन और विनिर्माण की पूरी श्रृंखला तक बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा, “बड़े उद्योगों के साथ MSME व स्टार्टअप को भी रक्षा आपूर्ति शृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।”

रक्षा मंत्री ने चार शक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, “आज डीआरडीओ के पास ज्ञान और प्रौद्योगिकी है, इंडस्ट्री के पास विस्तार और विनिर्माण क्षमता है, स्टार्टअप के पास नवाचार और तेजी से काम करने की क्षमता है और हमारे युवाओं के पास नए भारत का सपना है। जब ये चारों शक्तियां एक साथ आएंगी, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रह जाएगा।”

आत्मनिर्भरता का व्यापक अर्थ

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ कुछ पुर्जे या हथियार बनाना नहीं है, बल्कि यह हमारे चरित्र और रवैये का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जिस देश के पास अपनी प्रौद्योगिकी है, उसके पास अपना भविष्य तय करने की ताकत भी है। इसलिए हमारी आत्मा में, हमारे मन में, हमारे विचार में, हमारी चेतना में आत्मनिर्भरता का भाव होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि उत्पाद बनाने से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण उत्पाद बनाने की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करना है। इसी उद्देश्य से कई योजनाएं शुरू की गई हैं ताकि देश के हर कोने से प्रतिभाओं को सामने लाया जा सके।

सरकार की नीतियां और पहल

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों का ज़िक्र किया। इनमें सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, 'मेक इन इंडिया' पहल, iDEX, अदिति योजना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत निजी क्षेत्र के लिए आवंटित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भर न रहे।

कार्यक्रम में जारी की गईं नई नीतियां और दिशानिर्देश उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप व MSME की फंडिंग और भविष्य की प्रौद्योगिकियों जैसे AI और क्वांटम कंप्यूटिंग में निवेश को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान हुआ।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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