लाठी के सहारे से चलने वाली दिव्यांग लड़की बनी IAS, रह चुकी है सरकारी टीचर
देश की बेटियाँ हर जगह भारत का नाम रोशन कर रहीं हैं। चाहे को भी क्षेत्र हो लड़कियां हर जगह अपना परचम लहरा रहीं है।
देश की बेटियाँ हर जगह भारत का नाम रोशन कर रहीं हैं। चाहे को भी क्षेत्र हो लड़कियां हर जगह अपना परचम लहरा रहीं है। सरकार भी लड़कियों को प्रोत्साहन देने में पीछे नहीं रही है।
सफल हुई लड़कियों से प्रेरणा लेकर अन्य लड़कियां भी उनकी तरह बनने की कोशिश कर रहीं हैं। मध्य प्रदेश से एक लड़की की ऐसी कहानी सामने आयी जिसे जानकार न केवल लड़कियां बल्कि हर इंसान प्रभावित होगा और प्रेरित होगा। आइये इस बारें में विस्तार से जानते हैं।
मध्य प्रदेश के बैतूल के छोटे से गाँव सोहागपुर में रहने वाली रजनी ने न केवल लड़कियों के लिए बल्कि दिव्यांगों के लिए एक मिसाल पेश की है। रजनी पोलियो के कारण लाठी का सहारा लेकर चलती थी लेकिन आज वो डिप्टी कलेक्टर है। उनको यह पोस्ट 2017 में मिली।
रजनी के पिता देवी प्रसाद वर्मा एक छोटे से किसान है। उन्होंने अपनी बेटी के सपने को पूरा करने के कोई भी कसर नहीं छोड़ी। जैसा कि समाज में देखा गया है कि लोग लड़कियों को यहाँ तक दिव्यांग व्यक्तियों को कमतर आंकते है। रजनी ने जो करके दिखाया है वह वाक़ई में प्रेरणादायक है।
रजनी के पिता खुद स्नातक है। शिक्षा का मूल्य वह जानते थे। अपनी दिव्यांग बेटी की शिक्षा के लिए उन्होंने व्यापक प्रबंध किया। रजनी की इच्छा थी कि प्रशासनिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण करें। 12वीं पास करने के बाद रजनी ने संविदा शिक्षक की परीक्षा दी और पास होकर पास के ही सरकारी स्कूल में टीचर बन गयी।
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सरकारी टीचर बन जाने के बाद भी रजनी ने पढाई नहीं छोड़ी। वह खुद से सिविल सेवा के लिए पढाई करती रही। साल 2012 में रजनी ने मध्य प्रदेश PCS की परीक्षा दी। जिसमे वह पास हो गयी।
इस परीक्षा में पेपर लीक का भी मुद्दा उठा था लेकिन हाईकोर्ट के 2016 में आये फैसले ने उनके डिप्टी कलेक्टर बनने का रास्ता साफ़ कर दिया। इस समय रजनी सिवनी जिले में तैनात है। उनके पिता देवी प्रसाद को उनपर बहुत गर्व है।



