सवाल 98: क्या है सोनभद्र मामला, क्यों मचा है इतना हल्ला?
इस समय सोनभद्र की चर्चा जोरों पर हैं। प्रियंका गाँधी के सोनभद्र जाते समय रोके जाने पर यह मामला और बढ़ गया।
इस समय सोनभद्र की चर्चा जोरों पर हैं। प्रियंका गाँधी के सोनभद्र जाते समय रोके जाने पर यह मामला और बढ़ गया। अभी खबर आयी कि TMC के सांसद सोनभद्र जा रहे थे उन लोगों को वाराणसी एयरपोर्ट पर रोककर गिरफ्तार कर लिया गया है। आइये जानते हैं कि क्या है सोनभद्र का पूरा मामला?
दरअसल उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में ज़मीन से जुड़े विवाद में 10 लोगों की मौत हो गयी। सभी मौते गोली लगने से हुई। इस घटना से पूरा पुलिस महकमा हिल चुका है। इस नरसंहार में ग्राम प्रधान सहित 11 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
क्या है सोनभद्र का मामला?
आपको बता दें कि 16 जुलाई को 32 ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर प्रधान समेत 300 लोग एक ज़मीन पर कब्ज़ा करने पहुंचे थे। इसके बाद विवाद हुआ और 10 लोगों की मौत हो गयी और इसके अतिरिक्त 23 लोग ज़ख्मी हो गए।
मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान फ़रार
पुलिस ने ग्राम प्रधान के भतीजे समेत 24 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। कहा जा रहा है मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान अब भी फरार है। नरसंहार में इस्तेमाल किए गए हथियारों को पुलिस ने बरामद कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वारदात पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिये हैं।
मामला यह था कि सोनभद्र के घोरावल थाना क्षेत्र के उधा गांव में दो साल पहले ग्राम प्रधान यज्ञदत्त ने एक IAS अधिकारी से 90 बीघा जमीन खरीदी थी। यज्ञदत्त ने इस जमीन पर कब्जे के लिये बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ पहुंचकर ट्रैक्टरों से जमीन जोतने की कोशिश की। स्थानीय ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो ग्राम प्रधान पक्ष के लोगों ने स्थानीय ग्रामीणों पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस गोलीबारी में 10 जानें चली गयी।
वहीं इस घटना पर विपक्ष को योगी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। इसी के सिलसिले में प्रियंका गाँधी वाड्रा सोनभद्र जा रही थी। पुलिस प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। पुलिस ने यह कार्रवाही इसलिए कि जिससे यह मामला राजनीतिक मोड़ न लें और मामला और न बिगड़े।

योगी आदित्यनाथ ने घटना का लिया संज्ञान
योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मिर्जापुर के मण्डलायुक्त तथा वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक को घटना के कारणों की संयुक्त रूप से जांच करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय करते हुए 24 घण्टे में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिये हैं। योगी ने इस घटना में मारे गये लोगों के परिजन को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता का एलान किया है।
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यहाँ ये बताना जरूरी है कि इससे पहले प्रधान पक्ष के लोगों को जमीन पर कब्ज़ा करने से रोका गया था। इस मामले की सुनवाई अभी कोर्ट में चल रही है। पुलिस ने कहा है कि जांच चल रही है अगर कुछ गड़बड़ मिली तो जमीन बेचने वाले IAS ऑफिसर पर भी कार्रवाही की जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि इस जमीन का पट्टा गलत तरीके से हुआ और गांववालों की जमीन अफसर ने ग्राम प्रधान को बेच दी।
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