गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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नेतान्याहू की सीरिया यात्रा पर कुवैत का कड़ा विरोध, बताया संप्रभुता का ‘घोर उल्लंघन’

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू के हालिया सीरिया दौरे को लेकर कुवैत ने कड़ी आपत्ति जताई है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का ‘घोर उल्लंघन’…

नेतान्याहू की सीरिया यात्रा पर कुवैत का कड़ा विरोध, बताया संप्रभुता का ‘घोर उल्लंघन’
(फोटो: IANS)

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू के हालिया सीरिया दौरे को लेकर कुवैत ने कड़ी आपत्ति जताई है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का ‘घोर उल्लंघन’ करार देते हुए इसे एक ‘अवैध प्रवेश’ बताया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की।

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कुवैत ने अपने बयान में कहा कि नेतान्याहू का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी उल्लंघन है। मंत्रालय ने सीरिया में इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाइयों और घुसपैठ पर भी चिंता व्यक्त की। कुवैत का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा व स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय अपील

क्षेत्रीय तनावों के बीच कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया है कि वे ऐसे कदमों के खिलाफ एक स्पष्ट रुख अपनाएं। कुवैत ने सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर कई अरब देशों की ओर से आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं।

नेतान्याहू का दौरा और सैन्य मौजूदगी

दरअसल, प्रधानमंत्री नेतान्याहू बुधवार को रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ दक्षिणी सीरिया में तैनात सैनिकों से मिलने गए थे। यह इलाका इजरायल के कब्जे में है। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि इजरायल ने अपने दम पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा किया है। इजरायली सैनिक दक्षिणी सीरिया के एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में मौजूद हैं, जहां वे दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद आगे बढ़े थे। यह इलाका पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था, जो 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।

इनपुट: IANS

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