बुधवार, 24 जून 2026 · नई दिल्ली
Breaking News Hindi

जानिए किसे कहते हैं भारत का इकलौता 'दामादों का गांव'?

आज हम आपको एक ऐसे ही गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे दामादों का गांव कहा जाता है.हमारे देश की ज्यादातर जनसंख्या गांव में रहती है.

जानिए किसे कहते हैं भारत का इकलौता 'दामादों का गांव'?

आज हम आपको एक ऐसे ही गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे दामादों का गांव कहा जाता है.हमारे देश की ज्यादातर जनसंख्या गांव में रहती है. हर गांव का अपना एक नाम होता है. लेकिन कुछ गांवों के नाम स्थानीय लोगों द्वारा वहां की संस्कृति और रहन सहन के आधार पर रख लिए जाते हैं. आज जानते ही हैं कि शादी के बाद लड़कियां ससुराल चली जाती हैं और अपनी बाकी जिंदगी वहीं बिताती हैं. लेकिन हमारे देश में एक ऐसा भी देश है जहां शादी के बाद लड़कियां ससुराल नहीं जाती बल्कि दामाद ही लड़की के घर आकर रहता है.

विज्ञापन

दरअसल, उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में स्थित इस गांव का नाम हिंगुलपुर है. हिंगुलपुर गांव को दामादों का पुरवा यानी दामादों के गांव के तौर पर भी जाना जाता है. बताया जाता है कि समय था जब हिंगुलपुर गांव कन्या भ्रूण हत्या और दहेज हत्या में बहुत आगे था, लेकिन आज के समय में इस गांव ने अपनी बेटियों को बचाने के लिए अनूठा तरीका अपनाया है. दशकों पहले गांव के बुजुर्गों ने लड़कियों को शादी के बाद मायके में ही रखने का फैसला किया. इस गांव में हर समुदाय के लोग इस प्रथा को अपनाते हैं जिनमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है.

couple non fiii

हिंगुलपुर गांव की लड़कियों के रिश्ते की बात में ये एक अहम शर्त होती है कि शादी के बाद दामाद को यहां रहना होगा. गांव में रहने आ रहे दामाद को रोजगार की भी दिक्कत ना हो, इसका बंदोबस्त भी गांव के लोग मिलकर करते हैं. हिंगुलपुर गांव में आसपास के जिलों जैसे कानपुर, फतेहपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद और बांदा के दामाद रह रहे हैं. इस गांव की विवाहित लड़कियां अपने पतियों के साथ घर-गृहस्थी बसा लेती है. इतना ही नहीं यहां एक ही घर में दामादों की पीढ़ियां बसी हुई हैं. बता दें कि हमारे देश में हिंगुलपुर केवल ऐसा अकेला गांव नहीं है.

couple non

ऐसा बताया जाता है कि शादी के बाद भी लड़कियों को अपने साथ रखने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि बेटी की शादी कहीं दूर करने पर दूसरे परिवार के बारे में सारी जानकारी नहीं मिल पाती है. कई बार आधी-अधूरी जानकारी पर ही रिश्ता तय कर लिया जाता है. जिसकी वजह से दोनों ही पक्ष परेशान होते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए इन इलाकों में बेटी के साथ दामाद को घर बसाने का रिवाज चलन में आ गया है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. यह खबर इंटरनेट से ली गयी है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

यह भी पढ़े:क्या है हिस्टीरिया और उसके लक्षण?

S

Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →