जानें शनिदेव का चमत्कारी मंदिर जहां कार्तिक पूर्णिमा के दिन शनिदेव प्रकट होते हैं?
भारत विश्वभर में अपने खूबसूरत और रहस्य से पूर्ण मंदिरों के लिए काफी प्रचलित है। इन मंदिरो से जोड़ी रहस्यमय कथा को सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा।
भारत विश्वभर में अपने खूबसूरत और रहस्य से पूर्ण मंदिरों के लिए काफी प्रचलित है। इन मंदिरो से जोड़ी रहस्यमय कथा को सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। इन्ही खास मंदिरों में से एक शनिदेव का मंदिर उत्तरकाशी जिले के गांव खरसाली में स्थित है। यह मंदिर काफी प्राचीन है तथा समुद्र तल से करीब 7000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। मान्यता है की इस चमत्कारी मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था। इस मंदिर की पांच मंजिला है लेकिन बाहर से देखने से पता नहीं चल पाता कि यह मंदिर पांच मंजिला है। जानकारों के अनुसार इस मंदिर के निर्माण में पत्थर और लकड़ी का उपयोग किया गया है।

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आप जानकर हैरान हो जाएंगे की इस मंदिर से जोड़ी लोगों में यह मान्यता है कि मंदिर में साल में एक बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन शनिदेव प्रकट होते हैं, कहा जाता है की इस दिन शनिदेव के ऊपर रखे घड़े या कलश खुद ही बदल जाते हैं। ये कैसे होता है इस बारे में कोई नहीं जानता। मान्यता के अनुसार जो भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आता है उसे शनिदोष से खत्म हो जाता है उसे शनिदोष से मुक्ति मिलती है।

इस भव्य मंदिर से जोड़ी एक और खास बात है की यहाँ अखंड ज्योति जलती रहती है और इस अखंड ज्योति के दर्शन से भक्तों के सभी दुःख से दूर रखती है। इस मंदिर में शनिदेव की कांस्य की मूर्ति विधमान है और साथ ही यहां एक अखंड ज्योति भी मौजूद है। कहा जाता है की हर साल अक्षय तृतीय पर शनि देव अपनी बहिन यमुना से यमुनोत्री धाम में मुलाक़ात करके खरसाली लौट आते है और भाईदूज या यम द्वितिया के त्यौहार यमुना को खरसाली ले जा सकते हैं, ये पर्व दिवाली के दो बाद भारतवर्ष में उल्लास के साथ मनाया जाता है।



