मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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उत्तराखंड: खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' पर भड़की कांग्रेस, राज्यपाल से मिलकर कार्रवाई की मांग

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए 'शुद्धिकरण यज्ञ' का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को राज्यपाल से…

उत्तराखंड: खड़गे की रैली के बाद 'शुद्धिकरण' पर भड़की कांग्रेस, राज्यपाल से मिलकर कार्रवाई की मांग
(फोटो: IANS)

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए 'शुद्धिकरण यज्ञ' का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात की और इस कृत्य को संविधान और सामाजिक न्याय का अपमान बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी पूरे राज्य में आंदोलन करेगी।

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कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में प्रीतम सिंह ने बताया कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की विशाल जनसभा के बाद, भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने उसी मंच का 'शुद्धिकरण' किया था। उन्होंने इस कृत्य को संविधान का उल्लंघन और देश के कानूनों के खिलाफ बताया।

संविधान और सामाजिक न्याय का अपमान

कांग्रेस पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान का जाति के आधार पर 'शुद्धिकरण' करना समानता के मूल्यों का सीधा अपमान है। पार्टी ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि 'देवभूमि' में छुआछूत और जातिगत भेदभाव की मानसिकता को कब तक संरक्षण दिया जाएगा। कांग्रेस के अनुसार, यह हरकत विशेष रूप से निंदनीय है जब यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या पिछड़े वर्ग के किसी व्यक्ति के खिलाफ की जाती है। पार्टी ने संविधान की रक्षा और हर व्यक्ति के सम्मान के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करने का संकल्प लिया।

चीन दौरे पर डोभाल को लेकर सवाल

इस बीच, एक अलग मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के चीन दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार के रुख पर तंज कसते हुए कहा, "हमारी सरकार कहती है कि चीन के साथ कोई मसला नहीं है... तो चीन से बात क्या करनी है?" दीक्षित ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है, क्योंकि एक तरफ वह सीमा पर किसी भी घुसपैठ से इनकार करती है, तो दूसरी तरफ एक उच्च-शक्ति प्रतिनिधिमंडल भेजती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक ओर चीनी उत्पादों के बहिष्कार की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एनएसए चीनी राष्ट्रपति से मिल रहे हैं, जिससे लोगों में भ्रम पैदा होता है।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तराखंड डेस्क

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