दवा कंपनियों की धोखाधड़ी पर सरकार का बड़ा कदम, फर्ज़ी दस्तावेज़ देने पर लग सकता है प्रतिबंध
दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब अगर कोई भी दवा निर्माता कंपनी लाइसेंस के लिए अपने आवेदन में फर्ज़ी या मनगढ़ंत दस्तावेज़ या आंकड़े जमा…
दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब अगर कोई भी दवा निर्माता कंपनी लाइसेंस के लिए अपने आवेदन में फर्ज़ी या मनगढ़ंत दस्तावेज़ या आंकड़े जमा करती है, तो उस पर एक निश्चित अवधि के लिए नए आवेदन करने पर रोक लगाई जा सकती है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसके लिए औषधि नियम, 1945 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है।
यह संशोधन औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत पहले से मौजूद प्रवर्तन प्रावधानों को और मज़बूत करेगा। मंत्रालय का यह कदम भारत की औषधि नियामक प्रणाली में पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।
क्या बदलेगा नए नियम से?
पहले, यदि कोई आवेदक गलत दस्तावेज़ या आंकड़े प्रस्तुत करता था, तो उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता था या मौजूदा लाइसेंस रद्द कर दिया जाता था। अब नए प्रावधान के तहत, नियामक प्राधिकरण (राज्य या केंद्र) को यह अधिकार मिल गया है कि वह दोषी संस्था को एक निर्धारित अवधि तक कोई भी नया आवेदन प्रस्तुत करने से रोक दे। यह नियम औषधि नियम, 1945 के तहत आने वाले सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगा।
हालांकि, इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले एक उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। संबंधित कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उसे अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, फैसले के खिलाफ अपील का भी प्रावधान किया गया है।
क्यों पड़ी इस सख्ती की ज़रूरत?
नियामक संस्थाएं किसी भी दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभाव का मूल्यांकन कंपनियों द्वारा दिए गए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही करती हैं। फर्ज़ी या मनगढ़ंत आंकड़ों का इस्तेमाल न केवल पूरी नियामक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है, बल्कि यह दवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
सरकार का मानना है कि यह संशोधन ऐसी गलत प्रथाओं को हतोत्साहित करेगा, आवेदकों की जवाबदेही बढ़ाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि दवाओं की मंज़ूरी केवल विश्वसनीय वैज्ञानिक सबूतों पर ही आधारित हो। यह कदम देश के औषधि नियामक ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और ईमानदार निर्माताओं को प्रोत्साहित करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है।
इनपुट: IANS



