झारखंड शराब घोटाला: ईडी के समन के बावजूद रोहित उरांव नहीं पहुँचे, पिता रामेश्वर उरांव को कल बुलावा
झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जाँच अब सीधे एक कांग्रेस विधायक के परिवार तक पहुँच गई है। कांग्रेस विधायक एवं पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के पुत्र रोहित उरांव सोमवार क
झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जाँच अब सीधे एक कांग्रेस विधायक के परिवार तक पहुँच गई है। कांग्रेस विधायक एवं पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के पुत्र रोहित उरांव सोमवार को ईडी के समन पर रांची कार्यालय में हाज़िर नहीं हुए। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने एजेंसी को पत्र भेजकर अतिरिक्त समय माँगा है। इसी तरह, 30 जून को तलब किए गए पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव ने भी ईडी को लिखे पत्र में कहा है कि अपने पक्ष से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ तैयार करने के लिए उन्हें कुछ और वक्त चाहिए।
अनुरोध पर फ़ैसला अभी बाकी, दोबारा समन की तैयारी
फिलहाल ईडी ने दोनों के समय-विस्तार के अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया है। सूत्रों के अनुसार, यदि पिता-पुत्र दोनों निर्धारित तारीखों पर उपस्थित नहीं हुए, तो एजेंसी एक सप्ताह के भीतर नए समन जारी कर सकती है।
छत्तीसगढ़ की कंपनी और कथित मनी ट्रेल की पड़ताल
ईडी इस मामले में झारखंड की नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन के दौरान निजी कंपनियों की भूमिका और कथित मनी ट्रेल की जाँच कर रही है। एजेंसी को संदेह है कि छत्तीसगढ़ की कंपनी श्री ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड को झारखंड में शराब आपूर्ति और मैनपावर सप्लाई का ठेका दिलाने में रोहित उरांव की भूमिका रही होगी। एजेंसी इस कंपनी के प्रवेश से जुड़े वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
2023 की छापेमारी में मिले थे 30 लाख नकद
इस मामले में ईडी पहले ही 23 अगस्त 2023 को रांची, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और कोलकाता समेत 32 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। उस कार्रवाई में रोहित उरांव के रांची आवास से 30 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। एजेंसी उस बरामदगी और कथित निवेश के बीच के संबंध भी खंगाल रही है।
एसीबी एफआईआर से शुरू हुई, अब पीएमएलए तक पहुँची जाँच
ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज कांड संख्या 9/2025 को आधार बनाकर पीएमएलए के तहत ईसीआईआर संख्या 10/2025 दर्ज की है। एसीबी ने नई आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे, उत्पाद विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह, विनय सिंह समेत कुल 10 लोगों को नामज़द आरोपी बनाया था। ईडी कुछ गिरफ्तार आरोपियों से जेल में भी पूछताछ कर चुकी है।
जाँच का दायरा अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक विस्तृत हो जाने के बाद यह मामला झारखंड की राजनीति में गहरी हलचल का केंद्र बना हुआ है।
इनपुट: IANS



