शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: जापान अब AI और मानवरहित तकनीक पर देगा ज़ोर, पीएम ताकाइची ने दिए संकेत

बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के बीच जापान अपनी रक्षा रणनीति में एक बड़ा तकनीकी बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने…

रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: जापान अब AI और मानवरहित तकनीक पर देगा ज़ोर, पीएम ताकाइची ने दिए संकेत
(फोटो: IANS)

बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के बीच जापान अपनी रक्षा रणनीति में एक बड़ा तकनीकी बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा है कि देश अपनी सुरक्षा तैयारियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मानवरहित तकनीकों के इस्तेमाल को तेज़ी से बढ़ाएगा। उन्होंने इन आधुनिक तकनीकों को रक्षा व्यवस्था में जल्द से जल्द शामिल करने की ज़रूरत पर बल दिया है।

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बुधवार को सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (SDF) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में प्रधानमंत्री ताकाइची ने यह बात कही। कमांडर-इन-चीफ के तौर पर सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "एआई और मानवरहित रक्षा प्रणालियों जैसी तकनीकों को ज्यादा तेजी से अपनाया जाना चाहिए। इन तकनीकों का विकास पारंपरिक रक्षा उपकरणों की तुलना में बिल्कुल अलग गति से हो रहा है।"

रक्षा नीति में संशोधन की तैयारी

प्रधानमंत्री ने बताया कि जापान इस साल के अंत तक अपने तीन प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा दस्तावेज़ों में संशोधन करने की तैयारी कर रहा है। ये दस्तावेज़ अगले कई वर्षों के लिए देश की रक्षा नीति की दिशा निर्धारित करेंगे। उन्होंने कहा, "संशोधित दस्तावेज जापान की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक नई दिशा तय करेंगे।" इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह पूर्वी एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम को लेकर जापान की चिंता है।

बदलते दौर की नई ज़रूरतें

जापान का मानना है कि भविष्य का युद्ध पारंपरिक लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें एआई-संचालित सिस्टम, ड्रोन और अन्य मानवरहित प्लेटफॉर्म निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। गौरतलब है कि जापान ने 2022 में अपनी रक्षा नीति में एक बड़ा फेरबदल करते हुए 'काउंटरस्ट्राइक क्षमता' हासिल करने का फैसला किया था, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अपनाई गई उसकी पारंपरिक रक्षात्मक नीति से एक बड़ा कदम था। उसी समय रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य भी तय किया गया था।

प्रधानमंत्री ताकाइची के पिछले साल अक्टूबर में पद संभालने के बाद रक्षा मंत्रालय और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के शीर्ष कमांडरों के साथ यह पहली बैठक थी। 1964 में शुरू हुई यह बैठक आमतौर पर हर साल होती है, लेकिन सितंबर 2019 के बाद से यह नियमित नहीं थी।

इनपुट: IANS

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