जापान की नई रक्षा नीति पर उत्तर कोरिया ने जताई आपत्ति, कहा- यह सैन्यीकरण का बहाना
जापान द्वारा अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण और विस्तार पर जोर देने वाली नई रक्षा श्वेत पत्र जारी करने के बाद उत्तर कोरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने इसे पड़ोसी देशों से खतरे का हवाला…
जापान द्वारा अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण और विस्तार पर जोर देने वाली नई रक्षा श्वेत पत्र जारी करने के बाद उत्तर कोरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने इसे पड़ोसी देशों से खतरे का हवाला देकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा पैदा करने का प्रयास बताया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया ने जापान पर दोबारा एक बड़ी सैन्य शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा रखने का आरोप लगाया है।
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया में प्रकाशित एक लेख में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक कांग वोन-चोल ने कहा कि जापान ने अपने सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए उत्तर कोरिया को एक "गंभीर और मौजूद खतरा" बताया है। प्योंगयांग ने विशेष रूप से जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने श्वेत पत्र जारी होने के बाद देश की सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था।
जापान की रक्षा नीति और उत्तर कोरिया का रुख
प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार के तहत जापान ने पिछले सप्ताह अपना पहला रक्षा श्वेत पत्र जारी किया था। इस दस्तावेज़ में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि जापान की आलोचना करते हुए उत्तर कोरिया ने अपनी सैन्य गतिविधियों का भी बचाव किया। प्योंगयांग का तर्क है कि उसे अन्य देशों की कथित "शत्रुतापूर्ण नीतियों" से निपटने और उन्हें रोकने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम पर दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया अप्रत्याशित नहीं है। हालांकि, मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह भी उल्लेख किया कि हाल के समय में प्योंगयांग ने जापान के साथ-साथ दक्षिण कोरिया-अमेरिका-जापान त्रिपक्षीय सहयोग के खिलाफ अपनी बयानबाजी तेज कर दी है। अधिकारी के अनुसार, संभवतः उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को सही ठहराने और चीन तथा रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
इनपुट: IANS



