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जापानी रेटिंग एजेंसी JCR ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई, मज़बूत अर्थव्यवस्था को बताया कारण

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत में, जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को अपग्रेड कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, JCR ने भारत की…

जापानी रेटिंग एजेंसी JCR ने भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ाई, मज़बूत अर्थव्यवस्था को बताया कारण
(फोटो: IANS)

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत में, जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को अपग्रेड कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, JCR ने भारत की 'फॉरेन करेंसी लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग' और 'लोकल करेंसी लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग' को 'बीबीबी+' से बढ़ाकर 'ए- स्टेबल' कर दिया है।

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एजेंसी ने इस अपग्रेड का मुख्य कारण भारत की लगातार ऊंची आर्थिक विकास दर को बताया है। JCR ने अपने एक नोट में कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ रही है, जिसे निजी खपत और सरकारी निवेश से बड़ा सहारा मिल रहा है।

नीतियों और बैंकिंग सेक्टर की तारीफ

JCR ने भारत सरकार की नीतियों की भी सराहना की है, जो आर्थिक वृद्धि में सहायक साबित हो रही हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और वस्तु एवं सेवा कर (GST) के सफल कार्यान्वयन का उल्लेख किया गया है, जिनसे देश का आर्थिक आधार पहले से अधिक मज़बूत हुआ है।

इसके अलावा, भारत के बैंकिंग सेक्टर को भी JCR ने मजबूत बताया है। एजेंसी के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कड़ी निगरानी और नई दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code) लागू होने से नॉन-परफॉर्मिंग लोन (NPL) का अनुपात 2 प्रतिशत से नीचे आ गया है, जो एक स्वस्थ बैंकिंग प्रणाली का संकेत है।

विकास दर के आंकड़े और अनुमान

रिपोर्ट में आर्थिक विकास के कुछ आंकड़े भी दिए गए हैं। JCR के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी और वित्त वर्ष 27 में इसके 6 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिसे इनकम टैक्स और जीएसटी में कटौती से बल मिलेगा। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की इसी अवधि की 6.9 प्रतिशत की वृद्धि से 0.9 प्रतिशत अधिक है।

एजेंसी ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ी है, लेकिन यह अभी भी RBI के निर्धारित लक्ष्य के दायरे में है।

इनपुट: IANS

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