भारत में डेटा सेंटर का महाविस्तार: 5 साल में 4 गुना बढ़ेगी क्षमता, 110 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद
भारत का डेटा सेंटर उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़े पैमाने पर क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग मुख्य भूमिका निभा रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश…
भारत का डेटा सेंटर उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बड़े पैमाने पर क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग मुख्य भूमिका निभा रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश की डेटा सेंटर क्षमता अगले पांच वर्षों में लगभग चार गुना बढ़ने की उम्मीद है, जिसके लिए करीब 110 अरब डॉलर के भारी-भरकम पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी।
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी जेएलएल (JLL) द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए समाचार एजेंसी IANS ने बताया कि 2029 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता बढ़कर 6 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। यह जून 2026 तक अनुमानित 1.6 गीगावाट की क्षमता से एक बड़ी छलांग होगी। इस विस्तार के लिए आवश्यक कुल 110 अरब डॉलर में से 88 अरब डॉलर सर्वर और रैक जैसे आईटी उपकरणों पर, 18 अरब डॉलर मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (MEP) इंफ्रास्ट्रक्चर पर और 4 अरब डॉलर रियल एस्टेट निर्माण पर खर्च होने का अनुमान है।
मांग में तेज़ी और घटती खाली जगह
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में ही डेटा सेंटर की मांग में ज़बरदस्त उछाल देखा गया और यह 101 मेगावाट तक पहुंच गई। यह पिछले तीन वर्षों की समान अवधि के औसत से 20% ज़्यादा है। मांग के साथ-साथ आपूर्ति भी मज़बूत रही, और इस दौरान 85 मेगावाट की नई क्षमता जोड़ी गई, जिसका बड़ा हिस्सा मुंबई और चेन्नई में केंद्रित था। पहले से बुक की गई क्षमता की तेज़ी से डिलीवरी के कारण, डेटा सेंटरों में खाली पड़ी जगह घटकर महज़ 2.8% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है, जो बाज़ार की मज़बूती को दर्शाता है।
विदेशी निवेश और सरकार की भूमिका
इस क्षेत्र में वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ (बड़ी टेक कंपनियाँ जो विशाल डेटा सेंटर चलाती हैं) एक अहम भूमिका निभा रही हैं। ये कंपनियाँ अपनी ज़रूरतों के लिए लगभग 30% नई क्षमता खुद ही विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिन्हें 'सेल्फ-बिल्ड' सुविधाएँ कहा जाता है। अनुमान है कि 2029 तक ऐसी परियोजनाओं के तहत 1.4 गीगावाट क्षमता तैयार हो जाएगी। इस बड़े निवेश के चलते मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाज़ारों के साथ-साथ हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर भी गीगावाट-स्तर के डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं।
सरकार की नीतियों ने भी निवेश को गति दी है। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स छूट (टैक्स हॉलिडे) की घोषणा की गई है, जो 31 मार्च, 2047 तक लागू रहेगी। इस नीतिगत पहल ने 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी निवेश प्रतिबद्धताओं को आकर्षित किया है। यह कदम भारत को वैश्विक AI और क्लाउड सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद कर रहा है।
इनपुट: IANS



