भारतीय सेना को मिलेगी नई ताकत, इजरायली तकनीक से रात में भी दिन जैसी निगरानी संभव
भारतीय सेना की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुंबई स्थित आरआरपी डिफेंस और इजरायल की रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी ईएससी बीएजेड…
भारतीय सेना की निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुंबई स्थित आरआरपी डिफेंस और इजरायल की रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी ईएससी बीएजेड प्राइवेट लिमिटेड ने हाथ मिलाया है, जिसके तहत भारत में एडवांस्ड थर्मल और नाइट-विजन सिस्टम का निर्माण किया जाएगा। इस साझेदारी का मुख्य आकर्षण 'डायमंड सिस्टम' नामक एक नई तकनीक है, जो कम लागत और कम बिजली की खपत में एक किलोमीटर दूर तक रात के अंधेरे में भी दिन जैसा साफ दृश्य मुहैया कराएगी।
इस समझौते से देश की सीमाओं की सुरक्षा को एक नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह तकनीक उन चुनौतियों का समाधान कर सकती है, जो पारंपरिक थर्मल इमेजिंग सिस्टम की ऊंची लागत के कारण पैदा होती हैं।
क्या है 'डायमंड सिस्टम' की खासियत?
इस नई तकनीक को पेश करते हुए आरआरपी एस4ई इनोवेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और सीईओ राजेंद्र चोडांकर ने कहा, "हम एक बिल्कुल नई तकनीक ला रहे हैं, जो अपने आप में अनूठी है... यह एक ऐसा उत्पाद है जहां हम रात में भी दिन की तरह देख सकते हैं।" उन्होंने बताया कि ईएससी बीएजेड के विशेष मालिकाना डिजाइन वाले सेंसर की वजह से यह सिस्टम बेहद प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध होगा। चोडांकर के मुताबिक, इस सिस्टम पर मौसम या पर्यावरण की अन्य परिस्थितियों का कोई असर नहीं पड़ता, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सीमाएं हर हाल में सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा, "इस उत्पाद के साथ आप कभी भी लक्ष्य नहीं चूकेंगे।"
भारत में होगा तकनीक का हस्तांतरण
इस साझेदारी के तहत सिर्फ उत्पाद का आयात नहीं होगा, बल्कि तकनीक का हस्तांतरण भी भारत में किया जाएगा। ईएससी बीएजेड के सीईओ असफ मचलेव ने इसकी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कहा, "पहले चरण में, हम इलेक्ट्रो-ऑप्टिक समाधान के लिए ज्ञान का हस्तांतरण करना चाहेंगे। इसके लिए इजरायली इंजीनियर भारत आकर इसे असेंबल करने की जानकारी देंगे।" भविष्य में कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता को भी भारत में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है, जिसका उपयोग ड्रोन, सिग्नल इंटरसेप्ट और अन्य रक्षा समाधानों में किया जा सकेगा।
मचलेव ने कहा कि उनकी कंपनी ग्राहक की जरूरत को समझकर समाधान तैयार करती है और यह सिस्टम इजरायल से ज्यादा गर्म, सर्द और बारिश वाले भारतीय मौसम में भी बेहतर काम करता है। उन्होंने बताया कि मुश्किल परिस्थितियों में दुश्मन का पता लगाने के लिए रडार और सिग्नल जैसी कई तकनीकों को एक साथ जोड़ा जाता है।
भारतीय सीमाओं के लिए क्यों है यह उपयोगी?
यह सिस्टम भारतीय सीमाओं की भौगोलिक विविधता के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है। एक विशेषज्ञ ने बताया कि गुजरात के कच्छ के रण से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके इजरायल के ही जैसे हैं, जहाँ यह तकनीक कारगर साबित होगी। साथ ही, कम बिजली की खपत के कारण इसे घने जंगलों में भी लंबे समय तक ऑपरेट किया जा सकेगा। इससे निगरानी चौकियों पर तैनात सैनिक अपने इलाके की बहुत स्पष्ट तस्वीर हासिल कर पाएंगे।
इनपुट: IANS



