रेलवे सुरक्षा में बड़ा कदम: स्वदेशी 'कवच' प्रणाली के विस्तार के लिए 170 करोड़ रुपये मंजूर
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के संचालन को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित 'ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन' (ATP) सिस्टम 'कवच' की तैनाती के…
भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के संचालन को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि स्वदेशी रूप से विकसित 'ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन' (ATP) सिस्टम 'कवच' की तैनाती के लिए 170 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस फंड का इस्तेमाल उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन में किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत, मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर के बचे हुए हिस्सों पर 'कवच 4.0' सिस्टम लगाया जाएगा। रेल मंत्रालय का कहना है कि यह कदम डिवीजन के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा और चिन्हित सेक्शन में ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षा की एक अतिरिक्त और उन्नत परत जोड़ेगा।
क्या है 'कवच' और यह कैसे काम करता है?
'कवच' भारत में ही विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे परिचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कई तरह से काम करता है:
- यह 'सिग्नल पासिंग एट डेंजर' (SPAD) यानी लाल सिग्नल को नजरअंदाज कर आगे बढ़ने से रोकता है।
- असुरक्षित स्थिति पैदा होने पर यह सिस्टम खुद ही ब्रेक लगा सकता है।
- यह मुश्किल हालात में ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है, जिससे हादसों का खतरा कम होता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर को रोकना है।
मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, "यह पहल भारतीय रेलवे की उस लगातार कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने नेटवर्क पर 'कवच' का दायरा बढ़ा रही है और रेलवे सिग्नलिंग व ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक बना रही है।"
सुरक्षा पर रेलवे का बढ़ता फोकस
रेलवे ने हाल के वर्षों में सुरक्षा को लेकर बड़े सुधार किए हैं। जुलाई में मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2025-26 में 16 रह गई। चालू वर्ष में जून तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसी तरह, 'कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स' (प्रति दस लाख ट्रेन किलोमीटर पर होने वाली दुर्घटनाएं) 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 हो गया है, जो करीब 91% की कमी दिखाता है।
सुरक्षा संबंधी कार्यों पर खर्च भी काफी बढ़ा है। यह 2013-14 के 39,200 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 1,20,389 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, 6,671 स्टेशनों पर सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन वाले इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम और 10,395 लेवल क्रॉसिंग गेट्स पर इंटरलॉकिंग की सुविधा दी गई है।
इनपुट: IANS



