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जापान: विदेशियों को स्वीकार करने के विरोध में भारी उछाल, युवाओं में भी बढ़ी असहमति

जापान में अधिक विदेशी नागरिकों को बसाने के विचार को लेकर लोगों की राय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टोक्यो विश्वविद्यालय के एक हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है कि देश में विदेशियों को…

जापान: विदेशियों को स्वीकार करने के विरोध में भारी उछाल, युवाओं में भी बढ़ी असहमति
(फोटो: IANS)

जापान में अधिक विदेशी नागरिकों को बसाने के विचार को लेकर लोगों की राय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टोक्यो विश्वविद्यालय के एक हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है कि देश में विदेशियों को स्वीकार करने का विरोध करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है, और यह भावना अब सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल हुए सर्वेक्षण में 56.3% लोगों ने अधिक विदेशियों को स्वीकार करने का विरोध किया।

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यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले 20.7 प्रतिशत अंक अधिक है, जो सामाजिक सोच में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। इसके विपरीत, इस विचार का समर्थन करने वाले लोगों का अनुपात घटकर केवल 9.4% रह गया है, जो 2024 की तुलना में 8.4 प्रतिशत अंक कम है।

युवा पीढ़ी में भी बढ़ा विरोध

क्योडो न्यूज एजेंसी के हवाले से अध्ययन बताता है कि विदेशियों के प्रति नकारात्मक रुख में यह बढ़ोतरी युवा पीढ़ी में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। 1987 से 1998 के बीच जन्मे लोगों में विदेशियों को स्वीकार करने के विरोध में 24.3 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, 1966 से 1976 के बीच जन्मे समूह में यह बढ़ोतरी 19.4 प्रतिशत अंक रही।

सामाजिक चिंता और निराशा से जुड़ाव

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को जापानी समाज के भविष्य को लेकर उम्मीद कम है, उनमें विदेशियों का विरोध करने की प्रवृत्ति अधिक है। टोक्यो विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के प्रोफेसर शिन अरिता ने इस बदलाव के पीछे कई कारण गिनाए। उन्होंने कहा, "विदेशी नागरिकों को स्वीकार करने के मुद्दे पर नकारात्मक चर्चाओं की बढ़ती मौजूदगी, सामाजिक चिंता और असंतोष इस बदलाव के पीछे एक कारण हो सकता है।" उनके अनुसार, समाज में व्याप्त बेचैनी और असुरक्षा की भावना भी लोगों के नजरिए को प्रभावित कर रही है।

अध्ययन का आधार

यह निष्कर्ष एक पैनल सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसे टोक्यो विश्वविद्यालय का सामाजिक विज्ञान संस्थान संचालित करता है। इसमें चुने हुए लोगों से समय-समय पर उनकी जीवनशैली और सामाजिक सोच पर सवाल पूछे जाते हैं। इस वर्ष के अध्ययन के लिए लगभग 3,800 लोगों के जवाबों को वैध माना गया। यह अध्ययन ऐसे समय में आया है जब घटती आबादी और श्रमबल की कमी के कारण जापान में विदेशी कामगारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है।

इनपुट: IANS

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