ईरान ने ट्रंप के ‘इकोनॉमिक डी-डे’ को बताया ध्यान भटकाने की कोशिश, कहा- यह उल्टा पड़ेगा
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रतिबंध अभियान को अपने घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश करार दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि यह तथाकथि…
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रतिबंध अभियान को अपने घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश करार दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि यह तथाकथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ खुद अमेरिका पर ही भारी पड़ेगा।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि यह कदम वाशिंगटन के बेहिसाब कर्ज और बढ़ते ब्याज खर्च से ध्यान हटाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने अमेरिका की नीतियों को विफल बताते हुए कहा, "विफल नीतियों पर अड़े रहने से केवल और हार ही मिलेगी।" अराघची ने इन प्रतिबंधों को "आर्थिक आतंकवाद" की संज्ञा दी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा दुनियाभर के देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बताया।
क्या है अमेरिका का 'इकोनॉमिक डी-डे'?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के खिलाफ इस नए अभियान का ऐलान किया था। इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ का नाम देते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार या वित्तीय संबंध बनाए रखेंगे, उन्हें गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करना है।
ईरान की आर्थिक घेराबंदी पर ज़ोर
यह कदम इज़रायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी 2026 को शुरू की गई संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा है, जो अब अपने छठे महीने में प्रवेश कर रही है। सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिका का पूरा ध्यान ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने पर केंद्रित हो गया है। इस अभियान के तहत ईरान की तेल तस्करी, वित्तीय लेनदेन और आय के अन्य स्रोतों को निशाना बनाने की तैयारी है। इसका एक अहम लक्ष्य ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह रोकना भी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और समुद्री आवाजाही में कमी के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में पहले से ही अनिश्चितता का माहौल है, जिससे तेल की कीमतों और शिपिंग लागत पर दबाव बना हुआ है।
इनपुट: IANS



