क्यों भारत ने अपनी सेना को दक्षिण चीन सागर भेजा?
चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और उसने एक बार फिर भारतीय सीमा में घुसपैठ कर वास्तविक नियंत्रण रेखा की यथास्थिति बदलने की कोशिश की है, हालांकि भारतीय सेना…
चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और उसने एक बार फिर भारतीय सीमा में घुसपैठ कर वास्तविक नियंत्रण रेखा की यथास्थिति बदलने की कोशिश की है, हालांकि भारतीय सेना ने इस कोशिश को नाकाम कर दिया। पर इससे तनाव की वजह का पता चलता है। पिछली बार जब गलवान में दोनोें की सेनाओं के बीच झड़प हुई थी तो भारत ने अपने युद्ध पोत दक्षिण चीन सागर भेज दिए थे इसलिए इस तरह की घुसपैठ अधिक गंभीर मुद्दा है।गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़प के ठीक बाद भारत ने चीन को कड़ा संकेत देने के लिए यह कदम उठाया था। उस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए थे, भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे।

चीन ने भी यह कहा था कि उसके भी सैनिक हताहत हुए थे। उसी समय भारत ने मलक्का स्ट्रेट में भी अपने जहाज भेजे थे। मलक्का स्ट्रेट चीन के दक्षिण पश्चिम में है और यह इस इलाक़े का व्यस्ततम समुद्रा रास्ता है। इस रास्ते चीन अपने निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत उत्पाद बाहर भेजता है और अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का लगभग 70 प्रतिशत दूसरे देशों से मंगाता है।

इसी संकीर्ण समुद्री रास्ते से चीनी युद्ध पोत हिंद महासागर में भी दाखिल होते हैं। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप और मलेशियाई प्रायद्वीप से होकर गुजरने वाला तंग समुद्री गलियारा है। इसके निकट ही अमेरिका के सामरिक साझेदार सिंगापुर के पूर्वी मुहाने पर स्थित है इसलिये भारत और चीन के बीच किसी टकराव की स्थिति में मलक्का का संकरा समुद्री गलियारा चीन को होने वाले व्यापारिक आवागमन में रुकावट पैदा करने वाला एक अहम इलाक़ा बन सकता है।दक्षिण चीन सागर और मलक्का स्ट्रेट में अपने युद्ध पोत भेज कर भारत ने चीन को एक साथ कई संकेत दिए हैं। भारत ने यह जता दिया है कि वह भी एक साथ कई मोर्चे खोल सकता है और चीन को उसके इलाक़े में जाकर चुनौती दे सकता है।

चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में अपनी किलेबंदी शुरू कर दी है। वहाँ अतिरिक्त सैन्य बल भेजा जा रहा है, नौसेना अपने युद्ध पोत वहाँ भेजने की तैयारी में है। ढाँचागत सुविधाएँ विकसित करने की दीर्घकालिक योजनाएँ बनाई जा रही हैं।चीन का मानना है कि अमेरिका उसे रोकने के लिए चीन सागर में अपनी मोर्चेबंदी कर रहा है। भारत को अमेरिका ने अपने पक्ष में मिला लिया है, दोनों अपने-अपने हितों के लिए एक दूसरे के साथ हैं और चीन के ख़िलाफ़ हैं।



