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किस मंदिर में बकरे की बलि दी जाती है लेकिन उसकी मौत नहीं होती?

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भारत विश्वभर में अपने खूबसूरत और रहस्य से पूर्ण मंदिरों के लिए काफी प्रचलित है।इन मंदिरों से जुड़ी रहस्यमयी कथा को सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारें में बताना जा रहे है जो अपने भीतर कई रहस्य समेटा हुआ है। भारत के सबसे प्राचीन मंदिर में शुमार बिहार के कैमूर जिले के कौरा क्षेत्र में स्थिति मुंडेश्वरी देवी मंदिर का चमत्कार देशभर में प्रख्यात है। इस मंदिर में वर्षो से बकरे की बलि देने की प्रथा है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे की यहाँ बकरे की बलि दी जाती है लेकिन उसकी मौत नहीं होती। यह मंदिर कैमूर पर्वत की पवरा पहाड़ी पर है। यह प्रख्यात मंदिर भगवान शंकर और देवी शक्ति को समर्पित है।

इस मंदिर से यह मान्यता जोड़ी हुई है की इस मंदिर में स्थापित भगवान विष्णु की मूर्ति 7वीं शताब्दी से पहले गायब या चोरी हो गई थी। इसके बाद शैव धर्म का महत्व बढ़ता चला गया और साथ ही विनीतेश्वर जी, मंदिर के इष्ट देव के रूप में पूजे जाने लगे। अगर इस मंदिर में बलि चढ़ाने की प्रथा के बारे में जानने की कोशिश करे तो यहाँ आमतौर पर बाकि मंदिरों के मुकाबले बलि चढ़ाने की प्रक्रिया थोड़ी अलग है। इस मंदिर में जिस बकरे की बलि चढ़ाई जाती है उसकी जान नहीं ली जाती। आप जानकर हैरान हो जाएंगे लेकिन यह सच है बलि चढ़ाने की प्रक्रिया भक्तों के सामने ही की जाती है।

बलि चढ़ाते समय माता की मूर्ति के सामने ही पुजारी चावल के कुछ दाने मूर्ति को स्पर्श करवाने के बाद बकरे के उपर फेंकता है। चावल फेंकते ही बुरा मानो बेहोश सा हो जाता है, मानो उस में प्राण ही न बचे हों और कुछ समय के बाद फिर इसी प्रकार दोबारा चावल बकरे पर फेंके जाते हैं व बकरा उठ जाता है। बलि चढ़ाने की क्रिया पूरी होने के बाद बकरे को छोड़ दिया जाता है। ऐसी मान्यता है की जो भी इस मंदिर में आता है उसकी मनोकामना जरूर पूर्ण होती है और वो खाली हाथ बिल्कुल भी नहीं जाता है।

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