इमरान खान को भारी पड़ी अदालत के खिलाफ बयानबाजी

238

पाकिस्तान में आए दिन कोई ना कोई मामले सामने आते रहते है. जैसे हाल ही में पाक के प्रधानमंत्री ने टमाटर की बढ़ती मंहगाई को लेकर भाषण दिया था. केवल ये एक ऐसा मामला नहीं है जो सामने आया है, पाकिस्तान में कई मामले पहले भी देखने को मिल चुके है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘‘न्यापालिका के खिलाफ” कथित रूप से टिप्पणी करना भारी पड़ गया. जिसके कारण उन्हें आयोग्य करार देने से संबंधी एक याचिका पाकिस्तानी अदालत में दायर की गई है. अपने विपक्षी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इलाज कराने के लिए लंदन रवाना होने के बाद, प्रधानमंत्री इमरान खान ने ये टिप्पणी की थी.

जिसके बाद पाक के एक नागरिक ताहिर मसूद ने शनिवार को लाहौर उच्च न्यायालय में यह याचिका दायर की. याचिका में इमरान खान के खिलाफ न्यायपालिका की निंदा करने के लिए अपमान का मामला चलाने का आग्रह किया गया है. जिस व्यक्ति ने शिकायत की है उसने कहा है कि प्रधानमंत्री ने शीर्ष न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों की आलोचना की है, जो अदालत के अपमान के दायरे में आता है.

imgpsh fullsize anim 1 7 -

बता दें कि पाक की शीर्ष अदालत ने 2013 में पहले ही न्यायपालिका के खिलाफ टिप्पणियों के लिए इमरान खान को नोटिस जारी किया है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता तलाल चौधरी एवं निहाल हाशमी के न्यापालिका विरोधी भाषणों पर अदालत द्वारा उन्हें सजा दिए जाने का हवाला देते हुए, शिकायतकर्ता ने कहा कि इमरान खान को अदालत व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए लिखित सूचना दी गई है.

यह भी पढ़ें : अमेरिका ने चीन के BRI पर भारत की चिंताओं का समर्थन किया

गौरतलब है कि इमरान खान ने हाल ही में 69 वर्षीय शरीफ को इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति देने के लिए, 700 करोड़ रुपये का हर्जाना पत्र जमा करने और अपनी सरकार की शर्त को खारिज करने के लिए लाहौर उच्च न्यायालय की आलोचना की और मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा और उनके उत्तराधिकारी को “न्यायपालिका” में जनता के भरोसे को बहाल करने” के लिए कहा.