IIT बॉम्बे छात्र की आत्महत्या: राज ठाकरे ने चेताया- जातिगत राजनीति से शिक्षा के मूल मुद्दे भटक रहे हैं
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या पर दुख जताते हुए कहा है कि हर दुखद घटना को जाति और धर्म के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति…
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने IIT बॉम्बे के 20 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या पर दुख जताते हुए कहा है कि हर दुखद घटना को जाति और धर्म के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति भारत की शिक्षा प्रणाली की गंभीर कमियों से ध्यान भटका रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ठाकरे ने चेताया कि इस तरह का ध्रुवीकरण मूल मुद्दों को कमजोर कर रहा है।
साहिल वाकोडे ने 18 सितंबर को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में IIT प्रशासन ने पहले उन पर परीक्षा में मोबाइल फोन और चैटजीपीटी के इस्तेमाल का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में जांच पूरी होने से पहले इसे सार्वजनिक करने के लिए माफी मांग ली। वहीं, छात्र के परिवार ने जाति-आधारित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है, जिसकी जांच चल रही है।
जातिवाद के जहर पर चिंता
राज ठाकरे ने एक एक्स पोस्ट में कहा कि इस पूरे प्रकरण में एक युवा की जान चली गई, लेकिन कोई इस बात पर चर्चा नहीं कर रहा कि उसे इतना बड़ा कदम उठाने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, "अगर सिर्फ जाति-आधारित उत्पीड़न का आरोप लगने पर बिना जांच पूरी हुए प्रोफ़ेसरों को दोषी मान लेना गलत है, तो आरोप साबित होने से पहले ही किसी गुजर चुके छात्र को दोषी ठहराना भी सही नहीं है।"
उन्होंने महाराष्ट्र में बढ़ते जातिवाद पर चिंता जताते हुए कहा, "यह जहर इतना फैल चुका है कि अब IIT तक पहुंच गया है। यह सचमुच दुखद है कि उन्हीं IIT में, जिन्हें पंडित नेहरू ने 'आधुनिक भारत का मंदिर' कहा था, एक छात्र ने आत्महत्या कर ली और इसके पीछे जाति का मुद्दा सामने आ गया।"
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
मनसे प्रमुख के मुताबिक, असली समस्या चरमरा चुकी शिक्षा व्यवस्था है, जो छात्रों पर भारी दबाव डाल रही है। उन्होंने कहा, "IIT का एंट्रेंस हो या कोई और प्रतियोगी परीक्षा, लाखों छात्र कुछ सौ सीटों के लिए होड़ करते हैं। चुने जाने के बाद उन पर पढ़ाई का भारी बोझ और फिर कैंपस प्लेसमेंट की चिंता होती है।"
ठाकरे ने कहा कि निराशा का यह भाव सिर्फ IIT छात्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कॉमर्स, आर्ट्स, डॉक्टर और इंजीनियर समेत हर क्षेत्र के छात्रों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हमें उस छात्र की जाति पर ध्यान देना चाहिए जिसने आत्महत्या की या उस चरमरा चुकी शिक्षा व्यवस्था को चुनौती देनी चाहिए जिसने उसे निराश किया?
छात्रों से अपील
राज ठाकरे ने छात्रों से अपील की कि वे अपने आंदोलन को व्यवस्था की कमियों को दूर करने पर केंद्रित रखें। उन्होंने कहा, "एक बार जब जाति और धर्म के मुद्दे बीच में आ जाते हैं, तो बातचीत को भटकाना आसान हो जाता है। ऐसी भटकाने वाली बातों में न फंसें।" उन्होंने कहा कि पिछले 30-40 वर्षों में शिक्षा के व्यवसायीकरण ने पूरे भारतीय शिक्षा तंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है, जिसे ठीक करने के लिए बड़े बदलावों की जरूरत है।
इनपुट: IANS



