गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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एक IAS, जो पैरालंपिक में रच रहा है इतिहास: सुहास यथिराज की प्रेरणादायक कहानी

प्रशासनिक सेवा और खेल के मैदान, दो अलग-अलग दुनिया में एक साथ शिखर पर पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन IAS अधिकारी सुहास एल. यथिराज ने यह कर दिखाया है। कर्नाटक के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने न सिर्

एक IAS, जो पैरालंपिक में रच रहा है इतिहास: सुहास यथिराज की प्रेरणादायक कहानी
(फोटो: IANS)

प्रशासनिक सेवा और खेल के मैदान, दो अलग-अलग दुनिया में एक साथ शिखर पर पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन IAS अधिकारी सुहास एल. यथिराज ने यह कर दिखाया है। कर्नाटक के एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने न सिर्फ UPSC की परीक्षा पास की, बल्कि पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए पदक जीतकर देश का नाम भी रोशन किया।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, जन्म से ही पैर में दिक्कत होने के बावजूद सुहास की खेल में गहरी रुचि थी। उनका यह सफर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक मिसाल है, जो आज लाखों युवाओं को प्रेरित कर रहा है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा का संघर्ष

2 जुलाई 1983 को कर्नाटक के हसन में जन्मे सुहास का बचपन चुनौतियों से भरा था। उनकी शुरुआती पढ़ाई कन्नड़ माध्यम में हुई, जिससे बाद में अंग्रेजी मीडियम स्कूल में दाखिला लेने में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पिता की नौकरी में लगातार तबादले होते रहते थे, जिस वजह से उनकी शिक्षा अलग-अलग शहरों में पूरी हुई। तमाम बाधाओं के बावजूद, उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

पिता की मृत्यु के बाद बदला लक्ष्य

साल 2005 में पिता के निधन ने सुहास को बुरी तरह झकझोर दिया। इसी मुश्किल घड़ी में उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया और UPSC की तैयारी शुरू कर दी। अपनी मेहनत के दम पर वह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी बने।

एक टूर्नामेंट से हुई पेशेवर बैडमिंटन की शुरुआत

सुहास बचपन से बैडमिंटन खेलते थे, लेकिन पेशेवर तौर पर खेलने का मौका उन्हें आजमगढ़ में तैनाती के दौरान मिला। वहां एक बैडमिंटन टूर्नामेंट का उद्घाटन करने पहुंचे सुहास ने आयोजकों से खेलने की इच्छा जताई। इजाजत मिलने पर उन्होंने कोर्ट पर उतरकर राज्य स्तर के कई अनुभवी खिलाड़ियों को हराकर सबको हैरान कर दिया।

यहीं पर पैरा-बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए प्रेरित किया।

अंतरराष्ट्रीय पदकों का सफर

इस नई शुरुआत के बाद सुहास ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

  • 2016: एशियन चैंपियनशिप में मेंस सिंगल्स में स्वर्ण पदक।
  • 2018: एशियन पैरा गेम्स में पुरुष टीम के साथ कांस्य पदक।
  • 2020: टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक।
  • 2023: एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक।
  • 2024: वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण और पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक।

खेल में उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें 2021 में 'अर्जुन अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया। सुहास ने 2008 में ऋतु से शादी की, जो 2004 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं और 2019 में मिसेज इंडिया भी रह चुकी हैं।

इनपुट: IANS

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