लाल किला के सफेद से लाल होने की कहानी
लालकिला भारत के ऐतिहासिक किलों में से एक है। लाल किला भारत में पर्यटकों के लिए सबसे अद्भुत पर्यटक स्थल माना जाता है।
लालकिला भारत के ऐतिहासिक किलों में से एक है। लाल किला भारत में पर्यटकों के लिए सबसे अद्भुत पर्यटक स्थल माना जाता है। देश ही नहीं विदेश से भी लोग लाल किला को देखने आते है। 1856 तक इस किले पर लगभग 200 वर्षों तक मुगल वंश के सम्राटों का राज था।
लाल किले को शाहजहाँ ने वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी से बनवाया था, बहुत से लोग इस बात से अवगत नहीं होंगे। 1648 में जब मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा किले का निर्माण किया गया था, तो यह सफेद रंग का था, यानि कि लाल किला सफ़ेद रंग का बनाया गया था।

यह किला पूरी तरह से सफ़ेद रंग के पत्थरों से बना हुआ है जिन्हें चूना पत्थर (Limestone ) कहते हैं। लेकिन काफी समय बीतने के बाद इन पत्थरों का रंग बुरी तरह से खराब हो गया था, सफ़ेद रंग उतरने लगा और किले की सुंदरता बहुत अधिक तक प्रभावित होने लगी थी। जिसकी वजह से ब्रिटिशों ने इसके ऊपर लाल रंग करा दिया। हालांकि आज भी ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि ये किला लाल रंग का है लेकिन इसकी असलियत इसके लाल रंग के नीचे छिपी हुई है।
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लाल किले के अंदर कई खूबसूरत इमारतें हैं जैसे दीवान-ए-आम, दीवान-ए-ख़ास, रंगमहल, मोती मस्जिद, मोर सिंहासन हैं। कोहिनूर हीरा, मयूर सिंहासन का एक हिस्सा था जिसको अंग्रेज अपने साथ ले गए। शासन के समय इस किले को किला-ए-मुबारक कहा जाता था। हर साल 15 अगस्त के दिन भारत के स्वतंत्रता दिवस के ख़ास मौके पर देश के प्रधानमंत्री क़िला पर अपना भाषण देते हैं।

