बिहार बोर्ड परीक्षा की ‘कॉपी’ कैसे चेक होती है?

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बिहार बोर्ड परीक्षा की 'कॉपी' कैसे चेक होती है?

बिहार बोर्ड के ज़्यादातर 12वीं और 10वीं के विद्यार्थियों को यह नहीं पता होता कि बोर्ड एग्ज़ाम की उत्तर पुस्तिकाएं चेक होने की क्या प्रक्रिया होती होती है l इस जानकारी के अभाव में कुछ विद्यार्थी रिजल्ट आने के बाद अक्सर यह कहते मिल जाते हैं कि बोर्ड रिजल्ट में जितने स्कोर की उन्होंने उम्मीद की थी उससे ज़्यादा मार्क्स आये या कम मार्क्स आये l कुछ विद्यार्थी यह भी शिकायत करते मिल जाते हैं कि उन्होंने सब सही किया फिर भी उनके नंबर कम आये lआज इस आर्टिकल द्वारा हम जानेंगे कि आखिर बोर्ड एग्जाम में कॉपी किस तरह से चेक होती है और हम ऐसा क्या करें जिससे हमारे ज़्यादा से ज़्यादा मार्क्स आए l

कैसे होता है बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन

एग्ज़ाम की उत्तर पुस्कतिकाएँ चेक करने के लिए बोर्ड देश भर के केंद्रों में भेजता है और विभिन्न स्कूलों से अनुभवीं शिक्षकों की नियुक्तियां करता है l हर शिक्षक को प्रति कॉपी के हिसाब से रूपया दिया जाता है lबोर्ड एग्ज़ाम खत्म होने के बाद सभी उत्तर पुस्तिका एकत्रित की जाती हैं और उन्हें विभिन्न केंद्रों (बोर्ड द्वारा चयनित) में चेकिंग के लिए भेजा जाता l

भेजने से उत्तर पुस्तिकाओ से नाम और रोल नंबर वाला पेज हटा दिया जाता है और उसकी जगह एक गुप्त कोड लिख दिया जाता है जिसका पता सिर्फ बोर्ड के स्टाफ को होता है l इस प्रक्रिया द्वारा बोर्ड यह सुनिश्चित करता है कि कॉपी चेक होने के दौरान कोई बेईमानी न हो l

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उत्तर पुस्तिकाओ के मूल्यांकन करने वाले हर शिक्षक को एक मार्किंग स्कीम दी जाती है l इस मार्किंग स्कीम में हर एक प्रश्न के उत्तर के लिए उत्तर संकेत या मूल्य बिंदु (Answer Key or Value Points) मौज़ूद होते है l उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान जिस उत्तर में ये सारे उत्तर संकेत या मूल्य बिंदु मौज़ूद होते है उस उत्तर को शिक्षक पूरे नंबर देता है l

अगर 12वीं के बोर्ड एग्ज़ाम की बात करें तो करीब 1 लाख विद्यार्थी 12वीं के बोर्ड एग्ज़ाम देते हैं l इसका मतलब बोर्ड के पास दो महीनों से भी कम का समय होता है पूरा प्रोसेस ख़त्म करने के लिए l कॉपी चेक करने वाले शिक्षक को भी प्रति कॉपी चेक करने के हिसाब से रूपया मिलता है lइसका मतलब इस पूरी प्रोसेस में समय बहुत कम होता है और साथ-साथ कुछ शिक्षक ज़्यादा से ज़्यादा पैसा भी कमाना चाहते हैं l

इसलिए जो विद्यार्थी सही उत्तर शीर्षक, उपशीर्षक बुलेट पॉइंट्स, डायग्राम इत्यादि का इस्तेमाल करके उत्तर लिखते हैं तो उनको पूरे नंबर मिलने की संभावना बढ़ जाती है lअगर उत्तर में बड़े-बड़े पैराग्राफ होंगे तो शिक्षक को जानकारी ढूढ़ कर निकालनी होगी l इस चक्कर में हो सकता है कि उत्तर में कुछ महत्वूर्ण बिंदु शिक्षक को न मिल पाएं l यह भी हो सकता है कि शिक्षक पूरे नंबर देने की जगह जल्दबाज़ी में औसत नंबर दे l उत्तर किस तरह दर्शाया गया है, यह भी है बहुत महत्वपूर्ण है l

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कुछ विद्यार्थियों को यह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी होती है कि हर एक प्रश्न के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लिखो तो पूरे नंबर ज़रूर मिलेंगेl ज़्यादा से ज़्यादा लिखने के चक्कर में ऐसे विद्यार्थियों अक्सर पूरा पेपर हल नहीं कर पाते lज़्यादा से ज़्यादा लिखने का कोई फ़ायदा नहीं है l आपको किसी भी उत्तर में पूरे नंबर तभी मिलेंगे जब आपने उस उत्तर के द्वारा कम से कम शब्दों में सही एवं सटीक जानकारी दी होगी l

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